जॉब दिलाने के नाम पर विदेश में भारतीय युवाओं से साइबर ठगी कराने वाली गैंग के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह विदेश में युवाओं के पासपोर्ट और आइडी छीन लेता था। यह गिरोह लाओस, कंबोडिया, वियतनाम और म्यांमार के साइबर स्कैम सेंटर से जुड़े थे। ये नेटवर्क भारतीयों को साइबर गुलाम बना रहे थे। राजस्थान पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी गिरोह (साइबर फ्रॉड और मानव तस्करी) का सोमवार रात खुलासा किया। पुलिस ने ब्यावर से राजकरण उर्फ रॉनी, सागर सिंह को गिरफ्तार किया। जबकि तीन आरोपियों जीतूराज फुलवारी उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से पकड़ा है। इसमें आरोपी जीतूराज ने 10 भारतीय युवाओं के पासपोर्ट-पसर्नल डॉक्यूमेंट चीनी हैंडलर्स को उपलब्ध कराए थे। एडीजी (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया- I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र) के डाटा एनालाइसिस में राजस्थान के 500 से अधिक लोगों की पहचान हुई है। जिन्हें जॉब का लालच देकर कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस देशों में भेजा गया था। इनमें से कई अब तक वापस भारत नहीं लौटे हैं। वहीं लौटे पीड़ितों ने खुलासा किया कि वहां हमारे साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और जबरन साइबर फ्रॉड करवाया जाता था। फेक प्रोफाइल से करोड़ों का फ्रॉड एडीजी (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया- जांच के दौरान ब्यावर में दबिश देकर आरोपी राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) और सागर सिंह निवासी ब्यावर को अरेस्ट किया गया। इनके मोबाइल, पासपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों से विदेशी हैंडलर्स, वीपीएन, फेक जीपीएस और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। इनसे पूछताछ के बाद ब्यावर निवासी जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से अरेस्ट किया गया। तीनों आरोपी टूरिस्ट वीजा पर म्यांमार जाने की तैयारी में थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया- साइबर स्कैम सेंटर में पहले हमें ट्रेनिंग दी जाती थी। इसके बाद फेक प्रोफाइल के जरिए भारतीय नागरिकों से सोशल मीडिया पर दोस्ती कर विश्वास जीता जाता था। उन्हें क्रिप्टोकरेंसी और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपए निवेश करवाए जाते थे। फ्रॉड की रकम म्यूल अकाउंट्स से निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन और कंबोडिया के हैंडलर्स तक पहुंचाई जाती थी। पासपोर्ट छीनकर बनाया जाता था बंधक, मारपीट की धमकी दी जाती जांच में सामने आया कि गिरोह युवाओं को विदेश में 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर हर महीने सैलरी का लालच देकर कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस भेजता था। विदेश पहुंचते ही युवाओं के पासपोर्ट और पहचान-पत्र जब्त कर लिए जाते थे। जहां उनके पासपोर्ट छीनकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट, फेक इन्वेस्टमेंट और क्रिप्टो फ्रॉड जैसे साइबर क्राइम करने के लिए मजबूर किया जाता था। रोजाना सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक काम कराया जाता था। काम छोड़ने पर हजारों डॉलर जुर्माना और मारपीट की धमकी दी जाती थी। पांचों आरोपियों की भूमिका जानें: कोई HR तो कोई फेक प्रोफाइल बनाता 1. राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) : कंबोडिया के पोइपेट स्थित स्कैम कंपाउंड में यह मुख्य रूप से HR की भूमिका निभाता था। जहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते थे, जिनसे प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक जबरन ठगी का काम कराया जाता था। 4 महीने पहले कंबोडिया से इंडिया लौटने के बाद इसने ब्यावर के कई युवाओं को अधिक वेतन 800 डॉलर हर महीने का लालच देकर कंबोडिया भेजा। इसके बदले इसे भारी कमीशन मिलता था। 2. सागर सिंह: यह पोइपेट (कंबोडिया) में भारतीय लोगों की फेसबुक पर फेक महिला प्रोफाइल बनाकर उनसे दोस्ती करता था। 5-7 दिनों तक सामान्य चैटिंग के जरिए पीड़ितों के परिवार, बैंक खाते की डिटेल्स, बिजनेस प्रोफाइल और वित्तीय स्थिति की गोपनीय जानकारी हासिल करता था। पूरी जानकारी जुटाने के बाद यह टारगेट को अपने टीम लीडर को सौंप देता था, जो क्रिप्टो निवेश की फर्जी स्कीम बताकर म्यूल खातों में पैसे ट्रांसफर करवाते थे। 3. जीतूराज फुलवारी उर्फ जेम्स: इसके नाम से क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बायनेन्स पर अकाउंट संचालित था। इसके माध्यम से यह USDT (क्रिप्टो) के जरिए कंबोडिया में काम कर रहे अन्य नेटवर्क बदमाशों को रकम ट्रांसफर करता था। भारत से फेक म्यूल अकाउंट और भारतीय मोबाइल नंबरों की सिम कार्ड्स साइबर सेंटर्स तक पहुंचाने में शामिल था। इसने करीब 10 भारतीय युवाओं के पासपोर्ट और पसर्नल डॉक्यूमेंट चीनी हैंडलर्स को उपलब्ध कराए, ताकि उन्हें कंबोडिया के स्कैम सेंटर्स में शामिल कराया जा सके। 4. रवि कुमार उर्फ माही: यह साल 2023 से ही कंबोडिया स्थित स्कैम कंपाउंड्स में एक्टिव था। वहां पीड़ितों को फेक फेसबुक प्रोफाइल का यूज करके भारतीय नागरिकों को फंसाने की ट्रेनिंग देता था। कंबोडिया में लंबे समय तक साइबर ठगी का काम करने के बाद यह चीनी हैंडलर्स के संपर्क में आकर कोलकाता के रास्ते म्यांमार के नए साइबर स्कैम सेंटर में शिफ्ट होने जा रहा था। 5. अनिल कुमार उर्फ डेविल: यह आरोपी जीतूराज (जेम्स) का भाई है, जो साल 2024 में कंबोडिया गया था। करीब एक साल तक स्कैम सेंटर में सक्रिय रूप से साइबर अपराधों का संचालन कर रहा था। इसे चीनी कंस्ट्रक्शन कंपनी में 'कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर' के छद्म रोल पर म्यांमार के यानचिया (Yanchia Township) स्थित स्कैम सेंटर भेजा जा रहा था। जिसे पुलिस ने म्यांमार की उड़ान भरने से ठीक पहले कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया। गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश पुलिस ने आरोपियों से पासपोर्ट, विदेशी वीजा दस्तावेज, मोबाइल, डिजिटल साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए हैं। पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां खंगालने के साथ अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।