नमस्कार, गोली मारकर भागे अपराधी का पीछा करने निकली पुलिस की कार बंद हो गई। पुलिसवाले धक्का लगाते दिखे। विधायक से टोलकर्मी ने आई-कार्ड दिखाने को कहा तो मामला बिगड़ गया और पानी के लिए लोग घी बहाने को तैयार हैं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पुलिस का ‘धक्का-मार’ सिस्टम आमजन को विश्वास है कि अपराधियों को कानून का भय नहीं है। बदमाश बर्थडे मनाने जेल से आते हैं। राजधानी में चाकू से मर्डर कर भाग जाते हैं। हाई सिक्योरिटी जेल में तौलिए से गला घोटा जा रहा है। ओवरलोड ट्रेलर हजार चालान के बावजूद लोगों को रौंदते घूम रहे हैं। अलवर के एक पेट्रोल पंप की घटना ने पुलिस का मखौल उड़ा दिया। दिनदहाड़े एक युवक ने पंपकर्मी को गोली मार दी। पर्सनल दुश्मनी थी। गोली मारकर बदमाश ने भागने में हड़बड़ी नहीं दिखाई। टहलता हुआ बाइक की तरफ गया। फिर आराम से निकल गया। सूचना पर पुलिस की डायल-112 वैन पेट्रोल पंप पहुंची। टीम ने मुआयना किया। लोग बोले- बदमाश उधर भागा है। पीछा करने के लिए टीम के ड्राइवर ने गाड़ी में बैठकर चाबी घुमाई। लेकिन कार स्टार्ट नहीं हुई। लोग हंसने लगे। दो-तीन जवानों ने धक्का लगाना शुरू कर दिया। किसी ने कहा- पीछे धकेलकर नहीं, आगे धकेलकर स्टार्ट करो। हालांकि बदमाश किसी तरह पकड़ा गया, लेकिन पूरे सिस्टम को ही आगे धकेलकर स्टार्ट करने की जरूरत है। 2. विधायक से आई कार्ड क्यों मांगा? विधायक सिर्फ एक पद नहीं। यह बरसों की तपस्या का प्रतिफल है। चुनाव में पानी की तरह पैसा बहाने का परिणाम है। रात-दिन लोगों की सेवा में साम-दाम दंड-भेद इस्तेमाल करने का माद्दा है। यह पद यूं ही नहीं मिलता। कई तो दरियां उठाने में ही खप जाते हैं, लेकिन विधायकी का टिकट नहीं मिलता। वैसे असली परीक्षा तो टिकट मिलने के बाद शुरू होती है। सोचिए, जिन अपनों को नहीं मिला वो किस-किस भांति से टांग खींचते हैं। बगावत करते हैं। हराने का पूरा प्रबंध कर देते हैं। किस्मत के सारे सितारे-ग्रह नक्षत्र एक सुध में हों तब जाकर विधायक बनने का सुअवसर मिलता है। ऐसे में अहंकार आ जाना स्वाभाविक है। तो स्वाभाविक अहंकार के साथ विधायक जी बोनट के नीचे हिंदी में विधायक की तख्ती लटकाए टोल प्लाजा से निकले। जैसा कि भगवान कृष्ण के साथ हुआ था कि उनके आगमन पर ताले टूट-टूट कर गिर गए और दरवाजे अपने आप खुलते चले गए। उसी तरह विधायक जी यह मानकर चल रहे थे कि टोल प्लाजा के बैरियर अपने आप ऊंचे हो जाएंगे और हरी बत्ती अपने आप जल जाएगी। लेकिन बैरियर ऊंचा नहीं हुआ। टोलकर्मी खिड़की से झांककर बोला- लाओ पैसा। विधायक जी के अहंकार में दरार पड़ी। अदना सा टोलकर्मी और पैसा मांगता है? ड्राइवर बोला- अरे, ये विधायक जी हैं। टोलकर्मी को कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने कहा- तो फिर आई कार्ड दिखाओ। इसी वक्त धरती फटी और उसमें से विधायक जी का अहंकार डायनासोर की तरह चिंघाड़ते हुए अपने पूर्ण स्वरूप में उजागर हुआ। उन्होंने मौके पर पुलिस बुलाई और नादान टोलकर्मी को 151 में बंद करा दिया। 3. चलते-चलते.. मानसून इन दिनों सूखा बीत रहा है। बादल आते हैं और हवा हो जाते हैं। राजस्थान जैसे ड्राय (शुष्क) प्रदेश में पानी का बड़ा महत्व है। पानी के लिए हम घी बहाने को तैयार हो जाते हैं। विश्वास न हो तो उदयपुर चलिए। यहां मेनारिया समाज के लोग हर साल अच्छी बारिश के लिए चारभुजानाथ को भोग लगाते हैं। इस बार भी पानी के लिए पीपे भर-भर कर घी बहाया गया। हालांकि घी चूरमे में बहाया है। भगवान को घी और काजू-बादाम से तर 1100 किलो चूरमे का भोग लगाया गया। अब तो इंद्रदेव को आदेश करो भगवान कि खुलकर बरसें, खिलकर बरसें। ताकि अन्नदाता के मुरझाए चेहरे खिलें। इनपुट सहयोग- धर्मेंद्र यादव (अलवर), मुकेश हिंगड़ (उदयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।