नमस्कार पूर्व सीएम अशोक गहलोत के 'जबरा फैन' ने बंगाल जीत के बाद जयपुर के बीजेपी दफ्तर में खूब झंडा लहराया। जीत का जश्न सीएम भजनलाल और दिग्गज नेताओं-कार्यकर्ताओं ने झालमुड़ी खाकर मनाया। बारां में शिक्षा मंत्रीजी फिर एक पुराने दोस्त के घर पहुंच गए और धौलपुर के इन्फ्लूएंसर का डांस कुछ खास है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. हवा का रुख भांपने वाले 'कार्यकर्ता' निदा फाजली साहब ने खूबसूरत शेर कहा है- अपनी मर्जी से कहां अपने सफर के हम हैं, रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं। बंगाल की जीत के बाद कांग्रेस के जबरा फैन कार्यकर्ता ने हवा का रुख देखा और सिर पर बीजेपी का झंडा उठा लिया। इतना ही नहीं, वफादारी साबित करने के लिए जी-जेवड़ी एक करके नगाड़े की धुन पर जमकर डांस किया। इन्हीं कार्यकर्ता का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे पूर्व सीएम अशोक गहलोत के आवास पर पहुंचे थे। फोटो खिंचवाने की मिन्नतें की थी। खुद को जबरा फैन बताया था। धोक लगाई थी, प्रणाम किया था। निदा फाजली साहब ने ये भी कहा था- दिल मिले या न मिले, हाथ मिलाते रहिए। कुल मिलाकर, राजनीति में सारे रंग जरूरी हैं। वक्त के हिसाब से हिजाब और नकाब बदल लेने चाहिए। 2. राजस्थान में ‘झालमुड़ी पार्टी’ कहते हैं कि मेहनत का फल मीठा होता है। इस बार बीजेपी के लिए मेहनत का स्वाद तीखा है। ये स्वाद है झालमुड़ी का। पश्चिम बंगाल की जीत के बाद जुबान पर सबसे ज्यादा स्वाद झालमुड़ी का। बात भी झालमुड़ी की। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्रीजी बंगाल में एक झालमुड़ी की दुकान पर पहुंच गए थे। दस रुपए की झालमुड़ी खाई थी। इस पर वहां की राजनीति में काफी तड़का लग गया, लेकिन झालमुड़ी हिट रही। बीजेपी ने प्रचंड जीत दर्ज की। ममता को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राजस्थान का विशेष आभार। राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में 8 नेताओं की टीम ने खूब मेहनत की। राठौड़ ने वहां एक इंटरव्यू में भी कहा था कि ममता की सीट भवानीपुर में राजस्थान के नेताओं ने माइक्रो-मैनेजमेंट किया। सीएम भजनलाल ने भी वहां जितनी सीटों पर प्रचार किया, सब भाजपा की झोली में आईं। ऐसे में राजस्थान के नेताओं का कद बढ़ा। लिहाजा जीत के बाद जयपुर में झालमुड़ी पार्टी की गई। नेता-कार्यकर्ता सब झालमुड़ी का लुत्फ उठा रहे थे। आंखों में पानी था। खुशी का भी और झाल का भी। 3. मंत्रीजी अपनों से मिले, सुकून मिला शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का एक और खास वीडियो सामने आया। खास इसलिए क्योंकि वे अपने एक पुराने दोस्त से मिले थे। इससे पहले भी उन्हें एक दोस्त बकरी चराते हुए मिल गया था। कारों का काफिला रोककर दोस्त से मिले, हालचाल पूछा और गले मिले। इस बार वे बारां पहुंचे थे। बारां से अटरू की राह पकड़ी। अचानक मंत्रीजी एक सामान्य से मकान की ओर बढ़े। जैसा मकान वैसे ही सामान्य लोग। मंत्रीजी एक हमउम्र व्यक्ति के पास पहुंचे। ये मंत्रीजी को बचपन के दोस्त। उनके साथ चारपाई पर बैठे। कंधे पर हाथ रखा। मेजबान ने पानी का गिलास बढ़ाया तो दोस्त को पहले पूछा। इस वीडियो को मंत्रीजी ने शेयर किया। बैकग्राउंड में 1981 की फिल्म याराना का गाना लगाया- तेरे जैसा यार कहां, कहां ऐसा याराना। छोटा सा कैप्शन दिया- अपनों से मिलन। एक सुकून भरा पल। शिक्षा मंत्रीजी ने बिना कुछ कहे बड़ी सीख दे दी- आदमी कितने ही बड़े मुकाम पर पहुंच जाए। सुकून अपनों के बीच ही पाता है। 4. चलते-चलते.. रील तो लाखों लोग बनाते हैं। लेकिन धौलपुर के विपिन की बात अलग है। उन्होंने अपनी कला का बहुत ही मारक इस्तेमाल किया है। आम रील की तरह उनकी रीलें भी दिखने में आम हैं। लेकिन आम जनता से सरोकार रखती हैं। विपिन रील बनाने के लिए धौलपुर की ऐसी लोकेशन चुनते हैं, जहां प्रशासन की नजर जाना जरूरी है। सड़कों के गड्‌ढे, सीवर के टूटे हुए ढक्कन, रास्तों पर भरा कीचड़ा और गंदा पानी, टूटे हुए नाले, बस स्टैंड की गंदगी। ‘परफेक्ट’ लोकेशन मिलते ही वे वहां पहुंचते हैं और फिल्मी गानों पर डांस या एक्टिंग कर रील बनाते हैं। इस तरह वे बहुत ही आसानी से समस्याओं की तरफ ध्यान भी आकर्षित करते हैं और तंज भी कर जाते हैं। बड़ी बात यह है कि उनकी रील आने के बाद उस जगह के हालात भी सुधर जाते हैं। आपने खबर का असर तो देखा होगा, लेकिन उनकी रील भी किसी खबर से कम नहीं। इनपुट सहयोग- नीरज चौधरी (धौलुपर), शुभम निमोदिया (बारां)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।