नमस्कार, लोकतंत्र बचाने और अराजकता हटाने का आह्वान करते हुए रेलमंत्री ने कह दिया- मैं नाराज फूफा नहीं, शांत फूफा हूं। भाजपा जिलाध्यक्षजी ने अपनी ही चूक पर ठहाका मारकर हंसने लगे। 95 साल के बाबाजी वोट डालने खाट में लेटे-लेटे आए और जयपुर में खूबसूरत लाइटिंग के बावजूद एक कमी रह गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. अपनी ही 'चूक' पर मुखियाजी ने लगाया ठहाका जयपुर में लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ सभा और रैली हुई। मंच पर पार्टी के दिग्गज मौजूद थे। भाषण देने वालों की कतार लगी थी। जयपुर सांसद मंजू शर्माजी का नंबर आया। उन्होंने मंच पर मौजूद सभी माननीय के नाम लिए लिए पार्टी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का नाम लेना भूल गईं। गलती को सांसद महोदया ने तुरंत सुधारा। बोलीं- माफी चाहती हूं। मुखियाजी का नाम बीच में रह गया। यह सुनकर मदन राठौड़ ठहाका मारकर हंसने लगे। कुछ देर बाद प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया संबोधित करने आ गए। उन्होंने भी सभी महोदय के नाम लिए, लेकिन प्रदेशाध्यक्षजी का नाम वे भी भूल गए। सब सोचने लगे कि माजरा क्या है। रहस्य से पर्दा संजय भाटिया ने ही उठाया। बोले- मंच पर विराजित जिन माननीय का नाम लेना है, वह लिस्ट खुद मदन राठौड़जी ने बनाई है। इस लिस्ट में उन्होंने अपना खुद का नाम नहीं लिखा है। यह बात सुनकर मंच पर आसीन और मंच के सामने बैठे लोग हंसने लगे। 2. रेलमंत्री बोले-मैं शांत फूफा रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव का पैतृक गांव पाली जिले का जीवंद कलां है। उनका जन्म जोधपुर में हुआ। उनकी शादी जयपुर में हुई। इस तरह पाली-जोधपुर के वे बेटे हुए और जयपुर के दामाद। इसी बात का जिक्र उन्होंने जयपुर में किया। बोले- कोई मुझे बेटा कहता है, कोई दामाद और कोई-कोई तो फूफा बना देता है। मैं नाराज फूफा नहीं हूं। शांत फूफा हूं। इस बात पर लोकतंत्र बचाओ का आह्वान करने वाले सभी माननीय खूब हंसे। इस बीच मंच पर विराजित एक भाईसाहब ने ससुराल पर चुटकी ले ली। रेलमंत्री पहले खुलकर हंसे। फिल बोले- भाईसाहब कह रहे हैं कि जयपुर वालों की कृपा से हमारा घर चल रहा है। ये बात सही है। हमें तो डांट भी जयपुर की ही पड़ती है। रेलमंत्रीजी का इशारा पत्नी की डांट की तरफ था। मंत्रीजी की इस बात पर भी जोरदार ठहाके लगे। 3. पंच-सरपंच चुनाव में मतदान का जोश कोई कहता है कि लोकतंत्र कमजोर हो गया है। कोई कहता है कि लोकतंत्र की हत्या हो गई है। कोई कहता है कि लोकतंत्र को बचाना पड़ेगा। लोकतंत्र को लेकर तरह-तरह की बातें होती हैं। लेकिन रामलालजी जैसे योद्धाओं के रहते कोई भी लोकतंत्र का बाल तक बांका नहीं कर सकता। आप सोचेंगे कि रामलालजी कौन हैं? रामलालजी टोंक के देवली उपखंड के छोटे से गांव बीजवाड़ में रहते हैं। उम्र 95 साल है। गुरुवार को गांव में पंच-सरपंच के वोट पड़े। रामलालजी चारपाई से उठकर चल-फिर नहीं पाते। ऐसे में मददगारों को जुटाया और चारपाई समेत पोलिंग बूथ पहुंच गए। अपना वोट डालकर ही उन्होंने दम लिया। जब तक भारत के वोटर की भावना और हिम्मत रामलालजी जैसी है। तब तक लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं। रामलालजी जैसे बुजुर्गों को भरोसा है कि उनका एक वोट कितना कीमती है और लोकतंत्र की मजबूती के लिए कितना जरूरी है। लोकतंत्र के पर्व में अपने प्रत्याशी के लिए समर्थक पूरा जोर लगाते नजर आए। चित्तौड़गढ़ के बोजुंदा में समर्थक मोटू-पतलू तक बन गए। इस बीच कहीं-कहीं पोलिंग पार्टी पर सवाल भी उठ गए। उदयपुर में खेरवाड़ा में पंच उम्मीदवार बाबूलाल ने कहा- पोलिंग पार्टी के कर्मचारी मनचाही जगह ठप्पा लगवा रहे हैं। वोटर किन हालात में बूथ तक पहुंच रहे हैं, उनके मत का सम्मान पोलिंग पार्टियों को भी करना चाहिए। 4. चलते-चलते.. अगले साल 18 नवंबर 2027 को जयपुर शहर अपनी स्थापना के 300 बरस पूरे कर लेगा। सोचिये तीन सदी पहले महाराजा जयसिंह द्वितीय ने कितने सुंदर शहर की नींव रखी थी। उस समय ऐसे व्यवस्थित शहर की कल्पना ही अपने आप में अद्भुत है। महाराजा जयसिंह ज्योतिष और वास्तु के गहरे जानकार थे। उन्होंने नौ ग्रहों के अनुसार नौ खंडों में शहर बनाया। चौराहों पर चौपड़ें और समकोण पर काटती हर गली। वक्त के साथ जयपुर शहर निखरता गया। किसी ने 7 सेनाओं को हराने के बाद 7 मंजिला मीनाई बनवाई तो किसी ने कृष्ण भक्ति में मुकुटनुमा महल ही बनवा दिया। कभी गुलाबी मेहमानों की शान में शहर का रंग गुलाबी कर दिया गया तो कभी एमआई रोड जैसे नए बाजार की स्थापना की गई। शहर के साथ लगाव भावात्मक होता है तो चप्पा-चप्पा खिला-खिला होता है। शहरवासी सड़क पर कचरा फेंकते हिचकते हैं, उन्हें पूरा शहर अपना घर लगता है। ऐसी भावना का शायद अभाव होता जा रहा है। विदेश से आने वाले सैलानी भी सोचते होंगे कि हमने दुनिया के सबसे खूबसूरत शहर की क्या दुर्दशा कर रखी है। हाल ही मेयर और निगम के अफसर-कर्मचारी सफाईकर्मियों की फौज के साथ रात 12 बजे सड़कों पर उतरे। झाड़ू लगाकर रस्म अदायगी की गई। फोटो खिंचवाई गई। लेकिन जलमहल की मानसागर झील की हालत क्या है? शहर की अंदरूनी गलियां कितनी साफ हैं? शाम के वक्त शहर में भीड़ और ट्रैफिक के क्या हालात होते हैं? साइकिल चलाने की जगह नहीं। पैदल चलने की जगह नहीं। हर जगह अतिक्रमण और ठसाठस भरे वाहन। शहर को हमने बदरंग कर दिया। हर दीपावली जयपुर की सजावट चर्चा में रहती है। आज भी है। परकोटे का हर बाजार खूबसूरती की होड़ में लगा हुआ है। हर तरफ चमक-दमक। रोशनी। सजावट। एक समाजसेवी सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर ने इस बीच स्टैच्यू सर्किल से रील बनाई। उसने कहा- जिन महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर बसाया, उनकी मूर्ति देखिये। पक्षियों ने इसे कितना गंदा कर रखा है। प्रशासन सुनता ही नहीं। मैं और मेरी टीम सफाई अभियान में जुट गए हैं। प्रशासन को या किसी को भी कोसना हल नहीं है। हम जहां हैं, वहीं से सफाई अभियान शुरू हो सकता है। जयपुर तब तक खूबसूरत रहेगा जब तक यहां रहने वालों की सोच खूबसूरत रहेगी। इनपुट सहयोग- सचिन शर्मा, रिषभ सैनी (जयपुर), मुकेश हिंगड़ (उदयपुर), ऋतुपर्णा मुखर्जी (चित्तौड़गढ़), महावीर बैरवा (टोंक)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।