नमस्कार, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने बच्चे पर ऐसा क्या ‘जंतर-मंतर’ किया कि गोद से उतरने को तैयार नहीं। बिजली वाले मंत्रीजी की मीटिंग में 'बत्ती गुल' हो गई। कर्मचारियों को रिलीव करने के मामले में एक मंत्री महोदय भड़क उठे और CI साहब का ‘लंगड़ी टांग’ खेल वायरल हो गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. हनुमान बेनीवाल का ‘जंतर-मंतर’ दिल्ली के जंतर-मंतर पर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को पूर्व जन्म का रिश्तेदार मिल गया। हुआ यूं कि कॉकरोच वालों के आंदोलन में नेताजी समर्थन देकर कार से निकल रहे थे। इस दौरान किसी समर्थक ने अपना बच्चा सांसद महोदय की गोद में दे दिया। लाड़-दुलार मिला तो बच्चा रमण गया। अब गोद से उतरने को तैयार नहीं। सांसद जी ने बच्चे के पापा को बुलाया। पापा का प्रयास फेल हुआ तो मां आई। बच्चा मां की गोद में भी जाने को तैयार नहीं। भीड़ से आवाज आई- बच्चे ने दबंग नेता को पकड़ लिया। नेताजी ने बच्चे को दुलारते हुए पूछा- हमारे साथ आंदोलन करेगा क्या? लोग हंसने लगे। बच्चे की मां से नेताजी कहा- इससे पूर्व जन्म का कोई रिश्ता है शायद। नेताजी की यही खासियत। यूथ पर उनका ‘जंतर-मंतर’ खूब चलता है। एक इशारे पर हनुमान सेना तैयार। हालांकि गोद में बैठाकर राजनीति सिखाने वाले कुछ नेताओं के साथ बेनीवाल जी का अनुभव अच्छा नहीं रहा। बड़े होकर वे कहीं और खेलने लगे। 2. ऊर्जा मंत्रीजी की ‘बत्ती फिर गुल’ बिजली वाले मंत्रीजी की बत्ती फिर से गुल हो गई। पहले जयपुर और अब कोटा। जयपुर में तो बत्ती तब गुल हुई थी जब रेलमंत्री आए हुए थे। पार्टी दफ्तर में ही भद्द पिट गई थी। रेलमंत्रीजी सौगातें गिना रहे थे। अचानक अंधकार छा गया। मोबाइलों की लाइट जलने लगी। घुस-मुस होने लगी। लोग दबी हंसी हंसने लगे। हालांकि उस मामले में बिजली कर्मचारी सस्पेंड किए गए, लेकिन दूसरा मौका जल्द आया। इस बार मंत्रीजी अपने गृह जिले कोटा में थे। जिला परिषद के हॉल में विधानसभा क्षेत्र सांगोद में किए गए काम गिनवा रहे थे। इस दौरान बत्ती गुल। हॉल में अंधेरा। किसी ने भागकर खिड़कियों के पर्दे हटाए। किसी ने दौड़कर जनरेटर शुरू किया। हीरे में अपनी चमक होती है। लेकिन यहां जनरेटर यूज करना पड़ा। 3. तालमेल का घालमेल सरकार विभागों के तालमेल से चलती है। लेकिन लगता है कि फिलहाल विभागों के बीच घालमेल चल रहा है। एक विभाग के अंडर आने वाली बॉडी में दूसरे विभाग के 22 पद स्वीकृत हैं। विभाग ने 4 कर्मचारियों को यह कहकर रिलीव कर दिया कि जगह नहीं है। तबादलों के दौर का असर हो सकता है। लेकिन अपने विभाग के कर्मचारियों को रिलीव होता देख दूसरे विभाग के मुखियाजी भड़क उठे। पारा हाई हो गया। जब पद स्वीकृत हैं तो रिलीव करने का क्या मतलब? उन्होंने अपने विभाग के सभी कर्मचारियों-अधिकारियों को APO कराया और वापस बुला लिया। हालांकि, इस पर सफाइयों का दौर चल रहा है। लेकिन खरी बात ये कि एक मुखियाजी ने बात दिल पर ले ली। 4. चलते-चलते.. CI साहब स्टार बन गए। चहुंओर उनकी तारीफ हो रही है। तारीफ का कारण अतिक्रमण हटाने के दौरान पत्थरबाजी का डंटकर सामना करने, या किसी वारंटी को पकड़ने, या तस्कर को डोडा-चूरा के साथ दबोचने, या चोर को थाना इलाके की सीमा के भीतर धर लेने, या बजरी माफिया का पर्दाफाश करने या पुल के नीचे लूट की साजिश रचते बदमाशों को डिटेन करने के लिए नहीं है। ये काम तो पुलिस करती रहती है। कानून के हाथ लंबे होते हैं। ऐसे में पुलिस कुर्सी पर बैठे-बैठे हाथ बढ़ाकर आरोपी को दबोचने में सक्षम है। मुश्किल तो पैरों के साथ है। पैरों को मौका-ए-वारदात तक जाना ही पड़ता है। निगरानी करनी पड़ती है। गश्त पर निकलना पड़ता है। भीलवाड़ा के जहाजपुर में भी SHO दयाराम गश्त पर निकले। नजरें पैनी थी। कान खुले थे। हर हलचल की नब्ज टटोलते हुए शहर में तफरी कर रहे थे। अचानक एक गली में हलचल दिखी। गाड़ी गली की तरफ मोड़ दी। पता चला कि कुछ बच्चे सड़क पर पाला बनाकर खेल रहे हैं। गार्जियन भी वहीं खुले में हवा खा रहे थे। बच्चे पाले की तरफ कांटी फेंकते और लंगड़ी टांग से ठुमकते हुए खेल में बिजी थे। एसएचओ साहब को अपना बचपन याद आ गया। गाड़ी से उतरे और बच्चों के साथ पाला खेलने लगे। कांटी फेंककर लंगड़ी टांग से पालों में पहुंचने का नियम उन्होंने बखूबी निभाया। किसी ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। लोगों ने इसे काफी पसंद किया। कभी-कभी जो काम दोनों टांगों से अपराधियों के पीछे भागकर नहीं होते, वे बच्चों के साथ एक टांग पर खेलकर हो जाते हैं। इनपुट सहयोग- प्रकाश तंवर (नागौर), नितिन शर्मा (कोटा), मनीष जैन (भीलवाड़ा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।