नमस्कार, जंतर-मंतर पर कहा गया था कि अगला नंबर राजस्थान के शिक्षा मंत्री का। अब मंत्रीजी को लेकर हो-हल्ला मचा है। एक ट्रकवाले के कारण जयपुर में पुलिस और परिवहन विभाग आमने-सामने हो गए हैं। भीलवाड़ा में सरकारी स्कूल के बच्चों के राजस्थानी प्रेम को सलाम। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. मदन दिलावर पर आई बला टालने की कोशिश जंतर-मंतर ने देश में धरना-प्रदर्शन का माहौल बना दिया है। जिसे देखिए वह धरना कर रहा है। जहां देखिए वहां प्रदर्शन चल रहा है। जंतर-मंतर पर मंच से कहा गया था- राजस्थान के शिक्षा मंत्री पर भी हमारी नजर है। धर्मेंद्र प्रधान के बाद उन्हीं का नंबर आएगा। बड़ी मुसीबत है। जेन-जी के कारण हड़कंप मचा हुआ है। अभी तक मदन दिलावर जी पर जेन-जी का ध्यान गया नहीं है। ऐसे में शिक्षा मंत्रीजी को संकट से बचाने कृषि मंत्रीजी प्रयास में जुट गए हैं। क्यों? क्योंकि जब कृषि मंत्रीजी घिरे हुए थे, तब शिक्षा मंत्रीजी ने कहा था- वे खरा सोना हैं। तो कृषि मंत्रीजी ने रीट-2021 का राग छेड़ दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रीजी को चिट्‌ठी लिख दी है कि रीट-2021 की उच्च स्तरीय जांच कराओ। इस दांव से शायद लोगों का ध्यान पूर्व शिक्षा मंत्री और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की तरफ चला जाए और मदन दिलावरजी पर आई बला टल जाए। वैसे शिक्षा मंत्रीजी से टीचर्स बड़े खफा हैं। जयपुर में धरना दे रहे हैं। धरने को विपक्ष हवा दे रहा है। टीचर्स का कहना है कि तबादलों के जरिए बदला लिया है। दूर-दूर भेज दिया। टीचर्स बोले- शिक्षा मंत्रीजी बोलते बहुत बुरा हैं। कहते हैं कि जो टीचर बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाते वो निकम्मे हैं। शिक्षा मंत्रीजी इतना कुछ झेल रहे हैं। इसके बावजूद विधायक रेवंतराम डांगा जी को चैन नहीं। जहां दिलावर जी को देखते हैं, सिफारिश की चिट्‌ठी लेकर पहुंच जाते हैं। 2. कालूराम के कारण दो विभाग आमने-सामने कभी-कभी किसी के सिर पर कौआ बैठ जाता है। ऐसे में सीधा काम भी टेढ़ा हो जाता है। अब बताइए एक ट्रक ड्राइवर की क्या बिसात? ऊपर से नाम भी कालूराम। तो कालूराम जा रहे थे झारखंड। ट्रक में भरे थे खिलौने। जयपुर की सीमा में RTO इंस्पेक्टर ने रोक लिया। जैसी कि हमेशा उम्मीद रहती है, दोनों के बीच बहस हो गई। बारिश नहीं आने और भयंकर उमस होने के कारण दोनों का मगज भी गर्म था। ऐसे में लेवा-देई हो गई। यानी छीना-झपटी, पकड़-धकड़ और फिर मारपीट। जिसमें कालूराम का सिर फूट गया। आरोप RTO इंस्पेक्टर पर। घटना के बाद हॉस्पिटल की रस्म अदायगी करने के बाद ड्राइवर कानोता थाने पहुंच गया। शिकायत करा दी। मामले पर इंस्टाग्रामबाजी-फेसबुकबाजी हो गई। RTO इंस्पेक्टर घबरा गया। किसी भले साथी ने इंस्पेक्टर को टिप्स दिए- तू क्यों घबराता है। एकाध रिपोर्ट तू भी दर्ज करा दे ट्रकवाले के खिलाफ। तो इंस्पेक्टर साहब दो-तीन साथियों को लेकर कानोता थाने पहुंच गए। बताया जाता है कि वहां पर SHO ने RTO इंस्पेक्टर के गाल पर थप्पड़ रसीद कर दिया। 151 में बंद किया सो अलग। कानोता थाने पर ही कुछ दिन पहले दो वकीलों के साथ पकड़ा-धकड़ी हो गई थी। वकीलों ने वहीं वर्दीवाले साहब की नाक रगड़वा दी और ‘वकील एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए धमकी देकर लौट आए। चूंकि RTO विभाग में वकीलों जितनी एकता नहीं है। फिर भी RTO संघ के नए-नवेले अध्यक्ष रॉबिन सिंह ने उम्मीद बांधी है। अब प्रदेशभर के RTO इंस्पेक्टर जयपुर के शहीद स्मारक पर पड़े आंदोलन का बिगुल फूंके हुए हैं। न्याय की मांग कर रहे हैं। कानोता थाना पुलिस का कहना है कि RTO इंस्पेक्टर पर केस दर्ज है। कार्रवाई से बचने के लिए पैंतरे लगा रहे हैं। खैर, इन दिनों पैंतरेबाजी बड़ी खतरनाक साबित हो रही है। दिल्ली में चले ऐसे ही पैंतरे के कारण प्रधान साहब शिक्षा महकमे के प्रधान नहीं रहे। 3. चलते-चलते.. धरना-प्रदर्शन के सीजन में राजस्थानी भाषा भी शामिल हो गई है। राजस्थान यूनिवर्सिटी में एक छात्रनेता भूख हड़ताल पर बैठा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में जब तक राजस्थानी भाषा का रेगुलर डिपार्टमेंट नहीं खुलेगा, वे अनशन पर रहेंगे। हैरानी की बात है कि राजस्थान में राजस्थानी के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। जबकि राज्यपाल महोदय के एक निर्देश पर मराठी को मंजूरी मिल गई। खैर, सच बात यह है कि अगर हम अपनी मायड़ बोली से प्यार करते तो आंदोलन की नौबत नहीं आती। पंजाब में पंजाबी के लिए आंदोलन की क्या जरूरत? स्कूल-कॉलेज में बच्चे पंजाबी भाषा में बात करते हैं तो कोई नहीं कहता कि हिंदी में बोलो, इंग्लिश में बोलो। भाषा कब से आदमी का स्तर तय करने लगी? यहां ये हाल है कि कोई इंग्लिश बोलने लगे तो उसे अलग नजरिये से देखा जाता है। मायड़ भाषा बोलते बच्चा कतराता है कि कहीं माता-पिता का फटका न पड़ जाए। इस नौबत के बीच भीलवाड़ा के मांडलगढ़ से एक वीडियो सामने आया। वीडियो स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडर्न स्कूल का है। स्कूली बच्चा राजस्थानी गीत की इंस्ट्रूमेंटल प्रस्तुति की डिमांड करता है। NCC की यूनिफॉर्म में तैयार बच्चा हारमोनियम बजाने लगता है। तबले पर उसका साथी संगत करता है। तीसरा हाथ में छड़ी लिए धुन का जबरदस्त आनंद उठाता है। धुन है- म्हारी घूमर छै नखराली रे… इनपुट सहयोग- स्मित पालीवाल (जयपुर), शिवम ठाकुर (जयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।