नमस्कार, कोटा में कांग्रेस नेता ने विधायक को चपरासी, मच्छर, चमचा और मुनीम कह दिया। धौलपुर नगर परिषद आयुक्त 'दो-ढाई' के चक्कर में लपेटे गए। जयपुर निगम ने मोमोज बेचने वाली लड़की को सरस बूथ अलॉट किया और ASI के विदाई समारोह में SHO साहिबा छा गईं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. हाड़ौती का 'दंगल' 1997 में आई फिल्म ‘औजार’ में एक डायलॉग था- जब दो दोस्त दुश्मन बनते हैं तो ज्यादा खतरनाक होते हैं, क्योंकि एक-दूसरे की कमजोरी जानते हैं। प्रहलाद गुंजल भाजपा में रहे। वसुंधराजी के करीबी थे। फिर 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले नाराज हो गए। वे लोकसभा का टिकट चाहते थे। टिकट मिला बिरला जी को। अनदेखी का आरोप लगाते हुए गुंजल साहब ने पार्टी छोड़ दी और कांग्रेसी हो गए। कांग्रेस ने इनाम के तौर पर लोकसभा का टिकट दिया, लेकिन बिरला के सामने गुंजल 40 हजार से ज्यादा मतों से हार गए। वहीं से अदावत गहरी हो गई। इन दिनों जबरदस्त बयानबाजी चल रही है। बिरला जी के करीबी विधायक संदीप शर्मा ने गुंजल पर जुबानी तीर छोड़ा। बोले- तुम्हारे काकाजी भी छात्रसंघ अध्यक्ष नहीं बन पाते। बिरला जी ने तुम्हें छात्रसंघ अध्यक्ष बनाया। देहात का जिलाध्यक्ष बनाया। आपकी पहचान ही बिरला जी से है। इस पर गुंजल ने पलटवार किया। बोले- नाखून बराबर भी एहसान नहीं है। मुगालते में मत रहना। उन्होंने बिरला जी को सेठजी और संदीप शर्मा को मुनीम की संज्ञा देते हुए कहा- मुनीमों को लिमिट में बोलना चाहिए। मच्छर बराबर लोग ज्ञान बांट रहे हैं। अपने सेठजी से कहिए बोलें, तब मैं बात करूंगा। 2. हरियाली पसंद आयुक्त साहब नगर परिषद के आयुक्त साहब को हरियाली बहुत पंसद। कस्बे में उनके प्रकृति प्रेम की चर्चाएं हैं। हरियाली से ऐसा लगाव कि खुद वाटर टैंकर ले जाकर सूखते पेड़ों में पानी देते। निराई-गुड़ाई करते। उन्हें पेड़-पौधों वाली हरियाली ही नहीं, बल्कि नोटों वाली हरियाली भी पसंद। ठेकेदार से वे कमीशन बढ़ाने की बात कह रहे थे। ठेकेदार ने चतुर बनने का प्रयास किया। मोबाइल का कैमरा ऑन करके साहब के घर पहुंच गया और 'दो-ढाई' परसेंट पर डील होने लगी। आयुक्त साहब बड़ी साफगोई से बात कर रहे थे कि इतने में नहीं होगा, यह तो कम है। लेकिन वे अड़ियल नहीं। उन्होंने ढाई के हिसाब से रकम ले ली और गिनने लगे। पता नहीं था कि वीडियो बन रहा है। वीडियो सामने आया तो साहब ने उसी साफगोई और सरलता से कह दिया कि ठेकेदार ही गलत है। वो मुझ पर फर्जी बिल पास कराने का दबाव बना रहा था। इतना ही नहीं। आयुक्त साहब ने ठेकेदार की शिकायत एसपी से कर डाली। ये अलग बात है कि कलेक्टर ने साहब को सस्पेंड कर राजधानी भेज दिया। 3. डेयरी बूथ ही न्याय? पुलिस से जाने-अनजाने कई गलतियां हो जाती हैं। जो गलतियां पुलिस जानबूझ कर करती है, वह गलती नहीं होती। पुलिस उसे सही कदम साबित कर देती है। लेकिन वाकई पुलिस से अनजाने में कुछ गलत हो जाए तो उसकी भरपाई के कई रास्ते हैं। पहली बात तो यह है कि लोग सड़क किनारे ठेले लगाते ही क्यों है? लगा भी लिया तो यह ध्यान रखना चाहिए कि सड़क और दुर्घटना का पुराना नाता है। पुलिस ने हड़बड़ी में ठेले को धक्का दिया और गर्म पानी लड़की पर जा गिरा। मदद करने की बजाए पुलिस लड़की को हड़काते हुए निकल गई। कोई बात नहीं। लड़की के शरीर का काफी हिस्सा जल गया और सोशल मीडिया पर लोग वीडियो शेयर करने लगे। इसके बाद हड़कंप मच गया। लड़की यूपी की थी, उसने योगी महाराज से भी गुहार लगा दी। कुल मिलाकर मामला काफी बढ़ गया। कॉन्स्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया गया। लड़की को डेयरी बूथ अलॉट करने का पर्चा भी नगर निगम ने जारी किया। जो लोग लड़की के लिए न्याय की मांग कर रहे थे वे असमंजस में हैं। न्याय बाकी है या फिर डेयरी बूथ ही न्याय है? 4. चलते-चलते.. चूरू महिला थाने के ASI जितेंद्र सिंह रिटायर हुए। थाने की SHO रत्ना विश्नोई ने सिंह साहब के रिटायरमेंट को यादगार बना दिया। साफा-माला तो हुआ ही। थाने के सामने डीजे लाया गया। देसी गानों की धुनें बजने लगीं। इसके बाद एसएचओ मैडम ने जबरदस्त डांस किया। सिविल ड्रेस में महिला कॉन्स्टेबल भी डांस में शरीक हुईं। महिला स्टाफ ने मेल साथी की विदाई को यादगार बना दिया। माहौल बिल्कुल परिवार जैसा रहा। कभी गला भर आया। कभी आंखें भीगीं। गीत-संगीत हुआ तो साहब थिरकते हुए थाने से विदा हुए। इनपुट सहयोग- नरेश भाटी (चूरू), राकेश गुसाईं (जयपुर), नीरज चौधरी (धौलपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।