नमस्कार प्रभारीजी ने बहरूपिया कहा तो हंगामा हुआ, लेकिन दौसा में बहरूपिये की बातों पर कलेक्टर मैडम खूब हंसी। जयपुर में विधायक बाबाजी ने 'मैंगो जूस' की बोतल का मुआयना किया। जोधपुर में विधायक मैडम को जवाब नहीं आया तो फटकार लगा दी और भजन गायक धनराज जोशी के निधन के बाद उनकी ज्ञानवाणी चर्चा में है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. कलेक्टर साहिबा के सामने 'बहरूपिया' कुछ दिन पहले प्रभारी जी ने एक बड़े नेताजी को बहरूपिया कह दिया था। इस पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। एक नेताजी ने तो चपेड़े मारने और जूतों की माला तक की बात कह दी थी। हालांकि बहरूपिया लोक कला है जो लुप्त होती जा रही है। लोक कलाकार इस कला को बचाने के लिए भरसक कोशिशें कर रहे हैं। ऐसे ही एक कलाकार हैं शमशाद। दौसा जिले के बांदीकुई के रहने वाले हैं। सच्चा बहरूपिया वही जो अपने अवतार का भरोसा दिला दे। मारवाड़ी सेठ बनकर शमशाद दौसा कलेक्ट्री पहुंच गए। कलेक्टर साहिबा समेत तमाम अधिकारियों-कर्मचारियों का जमघट वहीं सीढ़ियों के पास लग गया। मारवाड़ी सेठ से बातों से गुदगुदाना शुरू किया। बोले- कुत्ता मेरे ढाई लाख रुपए लेकर भाग गया। कोई बात नहीं कलेक्टर महोदया दे देंगी। इस पर कलेक्टर सौम्या झा हंसने लगीं। सेठ बोला- झूठ बोलते नहीं। सच बोलने की आदत नहीं है। धंधा धेले का नहीं, फुरसत मिनट की नहीं। इस पर कलेक्टर साहिबा के साथ अधिकारी-कर्मचारी भी मुस्कुराने लगे। प्रशासनिक अधिकारियों कर्मचारियों का हंसना-मुस्कुराना जरूरी है। दबाव और तनाव के बीच ऐसे पल ऊर्जा देते हैं। 2. विधायक बाबाजी के हाथ में 'मैंगो-जूस' की बोतल दूर से विधायक बाबाजी के हाथ में मैंगो जूस नजर आ रहा था। वे कभी बोतल को सूंघते तो कभी ऊंचा करते बोतल को तल के सिरे से दिखने लगते। एक एक्सपर्ट भी मुआयना करने के लिए मौजूद थे। बाबाजी की तरह उन्होंने भी बोतल में भरे तरल पदार्थ को सूंघा और फिर नाक से दूर कर दिया। बाबाजी के इलाके में पीला पानी आ रहा है। बीसलपुर का पानी पीला तो नहीं आता। ऐसे में मिलावट शहरी ही नजर आ रही थी। बाबाजी ने पानी का सैंपल लैब के लिए अपने पास रख लिया। मौके पर अधिकारियों की टीम पहुंच गई। बाबाजी इलाके में कई जगह घूमे। एक महिला ने बताया कि कई दिन से गंदा पानी आ रहा है। उसने गली में रखे बड़े से भगोने की ओर इशारा किया। बाबाजी ने चुल्लू में पानी भरा और घूंट भरकर कुल्ला कर दिया। एक्सपर्ट ने भी वैसा ही किया। कुल मिलाकर बात यह निकली कि इलाके में साफ-सफाई नहीं होने का असर पेयजल की सेहत पर पड़ रहा है। बाबाजी ने फोन निकाला और जिम्मेदारों की वहीं से क्लास लेने लगे। बोले- सफाई हो जानी चाहिए। बाबाजी फायरब्रांड हैं। अधिकारी अब तक नहीं भूले हैं कि बाबाजी ने कहा था- मैं बाबा नहीं बवाल हूं। क्षेत्रवासी उम्मीद कर रहे हैं कि मैंगो जूस जल्द ही साफ पानी में तब्दील हो जाएगा। 3. ओरण के सवाल पर विधायक मैडम बोलीं- हटा.. पत्रकार को चाहिए था कि वह विधायक मैडम को बताया कि ओरण क्या है। इसके बाद मैडम से सवाल पूछता कि ओरण क्या है? लेकिन पत्रकार ने ऐसा नहीं किया। उसने सीधे विधायक मैडम से सवाल कर दिया- ओरण क्या है? आपकी ओरण से क्या हमदर्दी है? मैडम को हमदर्दी शब्द समझ आ गया। इसलिए हमदर्दी को दरकिनार कर दिया। बोलीं- हमदर्दी तो क्या है, बाकी ओरण में किसानों को जगह मिल जाए। काम-काज मिल जाए तो किसानों का फायदा है। पत्रकार को सवाल का उत्तर नहीं मिला। उसने फिर पूछा- ओरण चीज क्या है? इस सवाल का जवाब भी मैडम ने उसी आत्मनिर्भरता के साथ दिया, जिसमें पहले सवाल का दिया था। बोलीं- ओरण सरकारी जमीन है। पत्रकार के हाव-भाव बता रहे थे कि जवाब गलत है। मैडम की आत्मनिर्भरता जवाब दे गई। उन्होंने इधर-उधर देखा। पीछे से समर्थकनुमा आवाज आई- ओरण यानी गोचर भूमि। लेकिन जवाब के साथ-साथ घुड़की भी आई- ये क्या सवाल पूछ रहे हो? क्यों इश्यू बना रहे हो? बाद में वीडियो वायरल करोगे। समर्थन मिलने के बाद मैडम में हिम्मत आई। उन्होंने कैमरामैन से कहा- अरे भाई हटा इसको। इसके बाद कैमरे का मुंह घूमकर दूसरी दिशा में हो गया। पत्रकार के साथ समर्थकों की बहस शुरू हो गई। पत्रकार से सरेंडर करते हुए कहा- मैं समझ गया, क्या पूछना है क्या नहीं।
4. चलते-चलते.. चलते-चलते बात उनकी जिनकी वाणी में जीवन की क्षणभंगुरता और नेक कामों का संदेश सुनाई देता था। मेवाड़ के विख्यात भजन गायक धनराज जोशी का उदयपुर में सड़क हादसे में निधन हो गया। वे भजन कार्यक्रम के बाद अपने घर बड़वाई (चित्तौड़गढ़) लौट रहे थे। गायक धनराज जोशी अपने लगभग हर भजन कार्यक्रम में एक बात कहते थे। अब उनकी यह बात सोशल मीडिया पर काफी शेयर की जा रही है। वे कहते थे- आप यूं ही क्यों बैठे हो अपने दिल को तोड़कर ?
हम तो सभी चले जाएंगे आपकी नगरी छोड़कर चलते रहेंगे ये काफिले हमारे बगैर भी साहब
एक तारा टूटने से आसमान सूना नहीं हो जाता मैं चला जाऊंगा तो दूसरे धनराज जोशी पैदा हो जाएंगे। इसलिए चलते रहेंगे काफिले हमारे बगैर भी। इनपुट सहयोग- राघवेंद्र गुर्जर (दौसा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार को मुलाकात होगी।