राजस्थान में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए डेटा और सॉफ्टवेयर की मदद से फैसले लेने पर जोर दिया जा रहा है। इसे लेकर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) में IIT बॉम्बे की ओर से PAVITRA सॉफ्टवेयर पर वर्कशॉप आयोजित की गई। इसमें अधिकारियों को बताया गया कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी इलाके में प्रदूषण किन कारणों से बढ़ रहा है। उसे कम करने के लिए कौन-से उपाय ज्यादा असरदार हो सकते हैं। ट्रांसपोर्ट, उद्योग और पराली का असर भी पता चलेगा PAVITRA में अलग-अलग जगहों से मिलने वाले प्रदूषण के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे परिवहन, उद्योग, घरों में ईंधन के इस्तेमाल, कृषि अवशेष जलाने जैसे स्रोतों से होने वाले प्रदूषण का आकलन किया जा सकता है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि किसी एक स्रोत पर नियंत्रण करने से हवा में PM-2.5 जैसे प्रदूषक कितने कम हो सकते हैं। अधिकारियों को डैशबोर्ड चलाकर समझाया वर्कशॉप में PAVITRA के डैशबोर्ड का इस्तेमाल करके अधिकारियों को उदाहरण के जरिए समझाया गया। इसमें बताया गया कि अगर किसी क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाया जाए, घरों में बिजली का उपयोग बढ़े या कृषि अवशेष जलाने में कमी आए तो प्रदूषण पर कितना असर पड़ सकता है। RSPCB अधिकारियों ने मंडल की ओर से प्रदूषण कम करने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी भी दी। IIT बॉम्बे की टीम ने सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और आंकड़ों को समझने की ट्रेनिंग दी। वर्कशॉप में PAVITRA परियोजना के प्रधान अन्वेषक प्रो. चंद्र वेंकटरामन सहित परियोजना की टीम मौजूद रही।