राज्य सरकार ने चर्चित वरिष्ठ आरएएस अफसर पंकज ओझा को करीब एक साल पहले फेसबुक पर भड़काऊ जातीय, सांप्रदायिक पोस्ट करने के आरोपों को सही मानकर चार्जशीट दी है। कार्मिक विभाग ने पंकज ओझा को चार्जशीट देते हुए 15 दिन में जवाब मांगा है। तय अवधि में जवाब नहीं देने पर एकतरफा अनुशानात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। पंकज ओझा अभी सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त निदेशक हैं। कार्मिक विभाग से जारी चार्जशीट में पंकज ओझा को किसी तरह की राजनीतिक, प्रशासनिक सिफारिश नहीं करवाने के लिए पाबंद किया है। उधर, ओझा ने आरोपों को गलत बताया है। चार्जशीट के आरोपों के मुताबिक- गोपालन निदेशक के पद पर रहते हुए पंकज ओझा ने अपनी फेसबुक आईडी (RAS Pankaj Ojha) से 2025 में 16 अक्टूबर, 19 अक्टूबर, 21 अक्टूबर, 22 से 25 अक्टूबर और 27 अक्टूबर को सार्वजनिक रूप से भड़काऊ,आपत्तिजनक राजनीतिक, सांप्रदायिक और जातिगत पोस्ट की और ऐसे पोस्ट को शेयर किया था। चार्जशीट में आरोप- पीएम-सीएम के खिलाफ पोस्ट की; नोटिस का जवाब तक नहीं दिया कार्मिक विभाग की चार्जशीट के अनुसार पंकज ओझा के खिलाफ भड़काऊ, जातीय-सांप्रदायिक पोस्ट करने की शिकायत मिली थी। शिकायत के बाद 19 जनवरी 2026 को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन अभी तक उसका जवाब नहीं दिया गया। फेसबुक पेज पर सार्वजनिक रूप से विवादास्पद, अभद्र, जातिगत, धार्मिक रूप से संवेदनशील और राजनीतिक प्रकृति की टिप्पणियां की हैं, जो राजकीय सेवक की गरिमा के प्रतिकूल है। कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के लिए भी अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाला फोटो भी फेसबुक पेज पर शेयर किया है। यह​ सब सामाजिक और धार्मिक सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला और संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। चार्जशीट में आरोप- पंकज ओझा ने सरकार की छवि को किया धूमिल चार्जशीट में आरोप है कि पंकज ओझा ने नियमों की अवहेलना कर सरकार और विभाग की छवि को धूमिल किया, जो गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। चार्जशीट में राजस्थान सिविल सेवाएं (आचरण) नियम-1971 के नियम 3, 4 और 11 का हवाला देते हुए लिखा- नियमों के अनुसार कोई भी अधिकारी, कर्मचारी अनुचित अशोभनीय आचरण नही करेगा। कर्तव्यनिष्ठा और कार्यालय की गरिमा बनाए रखेगा। सरकार के किसी कदम या नीति की अलोचना नहीं करेगा। सार्वजनिक तौर पर किसी व्यक्ति विशेष या किसी पार्टी अथवा संस्थान के खिलाफ तथ्यहीन, निराधार, असत्यापित, गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले अनर्गल, मनगंढत टिप्पणियां प्रचारित-प्रसारित नहीं करेगा। आपने इन नियमों की अवहेलना कर सरकार, विभाग की छवि को धूमिल किया। जातिगत जनगणना की आलोचना सेवा मर्यादा के खिलाफ चार्जशीट के मुताबिक- 25 अक्टूबर 2025 को फेसबुक पोस्ट कर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। ओझा ने लिखा था- जातिगत जनगणना ही क्यों, जातिगत 'करदाता' और जातिगत 'अपराध' के भी तो आंकड़े सार्वजनिक करो, तो चले पता किसका कितना योगदान है। इस पोस्ट को सरकार के फैसले की आलोचना माना है और इसे सेवा मर्यादा के विपरीत माना है। ओझा बोले- मैं तो खुद पीड़ित हूं, मेरे नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट शेयर किए पंकज ओझा ने चार्जशीट मिलने के मामले में कहा- मैंने कोई आपत्तिजनक पोस्ट नहीं की, मेरे नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर डाले गए, मैं तो खुद पीड़ित हूं। ओझा ने कहा- मैंने 29 दिसंबर 2025 को ही कार्मिक सचिव और मुख्य सचिव को इन पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था। मैंने जयपुर कमिश्नर से मिलकर मामले में कार्रवाई का आग्रह किया था। इस मामले में अशोक नगर थाने में परिवाद भेजा, जिसकी जांच जारी है। कार्मिक विभाग को बाद में किसी ने गुमनाम शिकायत भेजी, जिस पर मुझे 19 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस मिला। इसका विस्तार से जवाब 27 जनवरी को दे दिया था। उस जवाब में मैंने साफ लिखा था कि मैंने कोई पोस्ट नहीं की। मेरे नाम से फर्जी पोस्ट बनाई गई। इसकी शिकायत भी कर दी थी। मैंने जवाब सरकार के पोर्टल राजकाज के द्वारा मैंने भेजा था, जिसकी रिसिप्ट मेरे पास है।