बालोतरा के पचपदरा में बन रही देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी के लिए राजस्थान की सियासत में 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' हुआ था। 2012 से 2026 तक का सफर इतना आसान नहीं था। इस प्रोजेक्ट ने न केवल दो बार शिलान्यास देखा, बल्कि जमीन के फेर में अपनों को अपनों के खिलाफ लड़ते भी देखा। 2012 से लेकर 2026 तक की बालोतरा रिफाइनरी की पूरी कहानी पढ़िए… लीलाना बनाम पचपदरा- भूमाफिया के खेल में 'जमीन' पर आए दाम शुरुआत में रिफाइनरी बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) के बायतु के लीलाना गांव में लगनी तय थी। जैसे ही घोषणा हुई, राजनीतिक रसूख वाले लोगों और भूमाफिया ने वहां हजारों बीघा जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली। किसानों की जिद- जब सरकार जमीन अवाप्त (कब्जा लेने) करने पहुंची, तो किसानों ने हाथ खींच लिए। कुछ ने 1 बीघा जमीन के बदले 1 करोड़ रुपए की मांग रख दी। शिफ्टिंग का दांव- तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने पचपदरा का रुख किया, जहां सरकारी जमीन उपलब्ध थी। रिफाइनरी शिफ्ट होते ही लीलाना में करोड़ों के ख्वाब देख रहे भूमाफिया और नेता अर्श से फर्श पर आ गए। कर्नल सोनाराम का विद्रोह बाड़मेर के राजनीतिक मामलों के जानकर शिव प्रकाश सोनी बताते हैं- रिफाइनरी शिफ्ट होने पर राजनीति में भूचाल आ गया। बायतु के तत्कालीन विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी (स्वर्गीय) ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया था कि गहलोत काकाणी में पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स लगाकर अपने गृह जिले जोधपुर को फायदा देना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया था- जान दे दूंगा, लेकिन रिफाइनरी को यहां से जाने नहीं दूंगा। उस समय राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी इस्तीफा तक दे दिया था। अब क्या है रिफाइनरी का गणित? यह रिफाइनरी HPCL (74%) और राजस्थान सरकार (26%) का संयुक्त उपक्रम है। 15 साल के लंबे इंतजार और ₹42,229 करोड़ की अतिरिक्त लागत (शुरुआती लागत से तुलना) के बाद अब यह रेगिस्तान की तस्वीर बदलने को तैयार है। राठौड़ बोले- इससे राजस्थान को 40 हजार करोड़ का फायदा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा- कांग्रेस ने 22 सितंबर 2013 को आनन-फानन में रिफाइनरी का शिलान्यास कर दिया था। हमारी सरकार ने इसके MOU निरस्त कर दिए। उसी कंपनी से दोबारा MOU किया। उत्पादन बढ़ाने का तय हुआ। हमारे MOU से राजस्थान को 40 हजार करोड़ का फायदा हुआ। पूर्व सीएम बोले- रिफाइनरी पर बोलने का अधिकार राजे को रिफाइनरी मामले पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा- वसुंधरा राजे हैं, जो रिफाइनरी पर हमारे कमेंट पर बोलने का अधिकार रखती हैं। रिफाइनरी क्या होती है, जिनको पता नहीं, पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स क्या होता है, इसके फायदे क्या हैं? यह मॉडर्न रिफाइनरी है। कंट्री की आधुनिक रिफाइनरी है। यह हाई टेक्नोलॉजी की रिफाइनरी है। कुछ पता नहीं लोगों को और भाषण दिए जा रहे हैं। मुझ पर अटैक किए जा रहे हैं। राठौड़ साहब रिसर्च करो पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- कम से कम मदन राठौड़ को कहूंगा क्योंकि वो BJP के अध्यक्ष हैं। राठौड़ साहब आप कम से कम चयन ऐसे लोगों का करो या फिर पहले स्टडी करो, पूरी रिसर्च करो। केंद्र और प्रदेश में आपकी सरकार है। आप तो पता लगा ही सकते हो कि हमारी क्या कमी है। फिर जमकर बोलो, फिर हम भी जमकर आपको जवाब देंगे। लेकिन ये जो रोजमर्रा के स्टेटमेंट आ रहे हैं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। -------- यह खबर भी पढ़िए… राजस्थान की रिफाइनरी से देश बनेगा एनर्जी सुपरपावर:एक्सपर्ट बोले- जामनगर और भटिंडा की तरह बनेगा नया पेट्रोकेमिकल हब, इकोनॉमिक मैप में आएगा नजर राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में बन रही देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड तेल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना अब अंतिम चरण में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को इसका उद्घाटन करने वाले हैं। पढ़ें पूरी खबर...