बांसवाड़ा और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी को पूछताछ के बाद गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। ‘शौर्य फाउंडेशन’ नाम की संस्था ने डूंगरपुर, बांसवाड़ा समेत सात जिलों के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास चलाने और सर्वे कराने के नाम पर सैकड़ों युवाओं को अपने जाल में फंसाया। शुरुआत में भुगतान कर जीता भरोसा पीड़ित संतोष कुमार निवासी दशहरा गामड़ी ने बताया कि सितंबर 2024 में संस्था ने भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। युवाओं को स्कूलों में सर्वे और स्मार्ट क्लास संचालन का काम दिया गया। भरोसा जीतने के लिए कुछ अभ्यर्थियों को शुरुआत में 7 से 7.5 हजार रुपए भी दिए गए, लेकिन बाद में किसी को नियमित भुगतान नहीं मिला। स्थायी नौकरी का लालच देकर वसूले लाखों संस्था के पदाधिकारियों ने युवाओं से कहा कि परियोजना तीन-चार साल चलेगी और आगे चलकर नौकरी सरकारी या स्थायी हो जाएगी। इसी बहाने प्रत्येक अभ्यर्थी से 1 लाख से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक वसूल लिए गए। संतोष कुमार से भी डेढ़ लाख रुपए लिए गए थे। दफ्तर बंद कर फरार हुए आरोपी जब युवाओं ने अपने पैसे वापस मांगे तो संस्था के लोग कार्यालय बंद कर फरार हो गए। अनुमान है कि संभागभर में 500 से 600 युवाओं के साथ इस तरह की ठगी हुई है। गुरुवार को पीड़ित अभ्यर्थी अपनी शिकायत लेकर जिला कलेक्ट्रेट भी पहुंचे। बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस डीएसपी मनीष चारण ने बताया कि संस्था ने टीएसपी क्षेत्र के सात जिलों में स्कूलों के नवीनीकरण और आधुनिक उपकरण लगाने के नाम पर भर्ती की थी। अब तक 28 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और कई अन्य लोग बयान देने पहुंचे हैं। सागवाड़ा स्थित संस्था का कार्यालय बंद है। पुलिस बैंक लेनदेन की जांच कर रही है और मामले की गहन पड़ताल जारी है।