राजस्थान के जंगलों में अब बाघों के साथ-साथ 'छोटी बिल्लियों' के संरक्षण पर भी फोकस किया जा रहा है। शिकार के लिए हवा में 11 फीट तक ऊंची छलांग लगाने वाली दुर्लभ बिल्ली 'कैरेकल' (सियागोश) के रहस्यों को जानने के लिए सवाई माधोपुर में एक बड़ा कंजर्वेशन प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। राज्य सरकार, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और टाइगर वॉच संस्था मिलकर अगले 18 महीने तक कैरेकल के व्यवहार, खान-पान और हैबिटेट पर रिसर्च करेंगे। राजस्थान में सिर्फ 50 कैरेकल बचे, रणथंभौर बना मुख्य ठिकाना टाइगर वॉच के फील्ड बायोलॉजिस्ट डॉ. धर्मेन्द्र खांडल ने बताया कि फिलहाल प्रदेश में 50 से 60 कैरेकल होने का अनुमान है। इनमें से अकेले 35 कैरेकल रणथंभौर में मौजूद हैं। वन विभाग और विशेषज्ञों के पास इनके करीब 450 फोटोग्राफ्स हैं, जिनके आधार पर अब इनकी सटीक संख्या का आकलन किया जाएगा। कैरेकल की PHOTOS… इन 4 टाइगर रिजर्व में चलेगा अभियान कैरेकल के संरक्षण की रूपरेखा तय करने के लिए यह प्रोजेक्ट चार प्रमुख क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। क्यों जरूरी है कैरेकल का संरक्षण? 6 साल की कोशिशों के बाद धरातल पर उतरा प्रोजेक्ट साल 2020 में रणथंभौर में 215 फोटो ट्रैप कैमरे लगाकर एक विशेष अभियान चलाया गया था, जिसमें 35 कैरेकल की पुष्टि हुई थी। उसी समय से इस प्रोजेक्ट के लिए प्रयास किए जा रहे थे, जो अब जाकर शुरू हुआ है। हाल ही में इसे लेकर विशेषज्ञों की एक वर्कशॉप भी आयोजित की गई, जिसमें देशभर के वन्यजीव प्रेमियों ने हिस्सा लिया। छोटी बिल्लियों का बचना भी जरूरी डीएफओ मानस सिंह कहते हैं- संतुलित इकोसिस्टम के लिए बाघों के साथ छोटी बिल्लियों का बचना भी जरूरी है। पहली बार राजस्थान में कैरेकल पर इतने व्यवस्थित तरीके से काम हो रहा है। ------------- कैरेकल से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… जैसलमेर में दुर्लभ बिल्ली को मारकर जलाया, वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला जैसलमेर में दुर्लभ बिल्ली कैरेकल को मारकर जला दिया। आरोपियों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। (खबर पढ़ें)