राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) अनिवार्य होने के बाद भी ट्रांसपोर्टरों को यह डिवाइस नहीं मिल रही है। ट्रांसपोर्ट संगठनों का दावा है कि इसके कारण 30 से 35 हजार ट्रक फिटनेस और परमिट की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इससे हजारों वाहन खड़े हैं और ट्रांसपोर्ट कारोबार पर बड़ा असर पड़ रहा है। विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सरकार और परिवहन विभाग पर व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि वे व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जब डिवाइस ही उपलब्ध नहीं है तो वाहन मालिक नियमों का पालन कैसे करें। इसी मांग को लेकर 8 जुलाई को जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दिया जाएगा। समाधान नहीं होने पर पूरे राजस्थान में अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है। कब से लागू हुआ नियम केंद्र सरकार ने AIS-140 मानकों के तहत कई श्रेणी के वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का नियम बनाया। इसके बाद राजस्थान परिवहन विभाग ने भी साल 2022 से इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके तहत अधिकृत कंपनियों के माध्यम से वाहनों में डिवाइस लगाने और उसे विभाग के पोर्टल से जोड़ने की व्यवस्था की गई। ट्रांसपोर्टरों का आरोप- डिवाइस नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने बताया- राज्य सरकार ने कॉमर्शियल ट्रकों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस अनिवार्य कर दिया है। नए नियमों के अनुसार जिस कंपनी का ट्रक है, उसी कंपनी के अधिकृत डिवाइस को लगाना जरूरी है। उनका आरोप है कि इससे कुछ कंपनियों तक ही व्यवस्था सीमित हो गई है। उन्होंने कहा कि जो डिवाइस पहले करीब तीन हजार रुपये में मिल जाती थी, अब उसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपये तक वसूली जा रही है। उनका आरोप है कि बाजार में डिवाइस की कमी होने का फायदा उठाया जा रहा है। इससे वाहन मालिकों का खर्च कई गुना बढ़ गया है और फिटनेस प्रमाण पत्र भी जारी नहीं हो पा रहे हैं। 30 से 35 हजार ट्रक खड़े होने का दावा
जगदीश चौधरी ने बताया- राजस्थान में अधिकृत कंपनियों के पास पर्याप्त संख्या में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण करीब 30 से 35 हजार ट्रक राज्य से बाहर खड़े हैं। यदि ये वाहन बिना जरूरी प्रक्रिया पूरी किए राजस्थान आते हैं तो ई-डिटेक्शन के जरिए चालान हो सकता है। साथ ही नेशनल परमिट और फिटनेस की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। हम नियम के खिलाफ नहीं, व्यवस्था ठीक करने की मांग कर रहे हैं ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि दूसरे राज्यों में बड़ी संख्या में कंपनियां यह डिवाइस उपलब्ध करा रही हैं, जबकि राजस्थान में केवल 17 कंपनियां ही अधिकृत हैं। उनका कहना है कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे सभी वाहन मालिकों को आसानी से डिवाइस मिल सके और परमिट व फिटनेस का काम समय पर हो सके। 8 जुलाई को जयपुर में धरना
एसोसिएशन ने बताया कि इस मुद्दे पर पूरे राजस्थान में संघर्ष समितियां बनाई गई हैं। सभी ट्रांसपोर्ट कारोबारी 8 जुलाई को जयपुर के शहीद स्मारक पर शांतिपूर्ण धरना देंगे। यदि इसके बाद भी परिवहन विभाग और सरकार ने समाधान नहीं निकाला तो पूरे राजस्थान में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। उनका कहना है कि इससे प्रदेश में माल परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।