राजसमंद शहर में मंगलवार को तीन जगहों पर नगर परिषद की ओर से रावण दहन किया गया। कांकरोली के बालकृष्ण स्टेडियम में 51 फीट और उपनगर धोइंदा और राजनगर के दीनदयाल उपाध्याय सर्कल पर 40-40 फीट के रावण के पुतलों का देर रात दहन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। वहीं, चारभुजा कस्बे में दशहरे पर रावण वध की वर्षों पुरानी अनूठी परंपरा निभाई गई। यहां रावण के पुतले को जलाने के बजाय पहले उसकी नाभि पर बंदूकों से फायर किया जाता है। इसके बाद ग्रामीण पत्थर बरसाकर रावण का वध करते हैं। इस बार 11 राउंड फायरिंग के बाद भी रावण नहीं गिरा। इसके बाद पत्थर बरसाए गए, जिससे रावण की आकृति का वध हो गया। श्रीराम की प्रतिमा के साथ निकले ग्रामीण चारभुजा मंदिर में उत्थापन और कसार आरती के बाद देवस्थान विभाग के सिपाही, मंदिर के पुजारी और कस्बेवासी भगवान श्रीराम की प्रतिमा के साथ इमली वाले बालाजी हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां कद्दू की बलि देकर शस्त्र पूजन किया गया। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने भी शस्त्रों का पूजन किया। इसके बाद ग्रामीण भगवान श्रीराम की प्रतिमा को सिर पर धारण कर गाजे-बाजे और जयकारों के साथ दर्शन घाटी स्थित रावण वध स्थल पहुंचे। यहां सरगरा समाज की ओर से पत्थरों से रावण की आकृति तैयार की गई थी। रावण के मुकुट और नाभि के स्थान पर मटके लगाए गए थे। नाभि पर गुलाल से भरी मटकी भी टांगी गई थी। 11 राउंड फायरिंग के बाद भी नहीं गिरा रावण शाम करीब 5:30 बजे रावण की नाभि पर निशाना साधते हुए 11 राउंड फायरिंग की गई, लेकिन इसके बाद भी रावण की आकृति नहीं गिरी। इसी दौरान देवस्थान विभाग की बंदूकों में तकनीकी खराबी की बात सामने आई। इसके बाद ग्रामीणों ने परंपरा के अनुसार पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। पत्थरों की मार से रावण धराशायी हो गया। रावण वध के बाद भगवान श्रीराम की प्रतिमा के साथ आरती की गई। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। सुरक्षा व्यवस्था के लिए चारभुजा थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह, सूचना अधिकारी जेठाराम सहित पुलिस जाब्ता तैनात रहा।