अलवर जिले में बुधवार को मानसून ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए करीब 3 से 4 घंटे तक रिमझिम बारिश की। इस सीजन की इस अच्छी बारिश से कई इलाकों के खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे। हालांकि, मुख्य बांधों को अभी भी जलस्तर बढ़ने का इंतजार है। गुरुवार सुबह से भी आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भारी बारिश के आसार जताए हैं। बांधों में पानी आने का इंतजार मानसून की शुरुआती बारिश में भर्तृहरि क्षेत्र में अच्छी मेघगर्जना हुई थी, जिससे इलाके के बरसाती नालों और रूपारेल नदी में थोड़ा पानी आया था। हालांकि, सिंचाई विभाग का कहना है कि अभी जिले के बड़े बांधों में पानी की आवक काफी नहीं है। जल संसाधन विभाग को उम्मीद है कि आगामी 2-3 दिनों में होने वाली तेज बारिश के बाद बांधों में पानी का जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो जाएगा। पिछले सालों का ट्रेंड: अमूमन इन दिनों तक अलवर के सिलीसेढ़, जयसमंद और मंगलसर जैसे बड़े बांधों में पानी की आवक शुरू हो जाती थी और रूपारेल नदी का बहाव भी तेज रहता था। पिछले साल इस अवधि तक जिले में औसत से करीब 15-20% अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी थी, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। इस बार की स्थिति: पिछले वर्षों की तुलना में इस बार मानसून थोड़ा ठहर-ठहर कर बरस रहा है। हालांकि बुधवार को हुई बारिश ने पिछले कुछ दिनों के कोटे को कवर करने की कोशिश की है, लेकिन कुल औसत बारिश का ग्राफ पिछले सालों के मुकाबले फिलहाल थोड़ा धीमा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही रफ्तार धीमी हो, लेकिन यह रिमझिम बारिश खरीफ की फसलों (बाजरा, ज्वार, ग्वार) के लिए 'अमृत' के समान है। आगे क्या: मौसम केंद्र के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के एक्टिव होने से अगले 48 घंटों में अलवर सहित मेवात अंचल में भारी बारिश की संभावना है। अगर ऐसा होता है, तो बांधों के रीते पड़े पेटे भर सकते हैं।