नौकरी के नाम पर हो रही मानव तस्करी और धोखाधड़ी को रोकने के लिए राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के अध्यक्ष और REDIO (Rescuing Every Distressed Indian Overseas) के चेयरमैन एवं सह-संस्थापक प्रेम भंडारी ने भारत के विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन को लेटर लिखा है। इसमें ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। पत्र की कॉपी राजस्थान के मुख्य सचिव श्रीनिवास और पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा को भी भेजी गई है। भंडारी ने अपने पत्र में विदेश मंत्रालय और राजस्थान सरकार द्वारा पहली बार राजस्थान में आयोजित ‘विदेश संपर्क आउटरीच कॉन्फ्रेंस’ की सराहना करते हुए कहा- यह एक दूरदर्शी पहल है, जो विदेश जाने वाले भारतीयों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन तभी वास्तविक रूप से सफल होगा जब विदेश मंत्रालय के साथ-साथ राजस्थान पुलिस भी मानव तस्करी और फर्जी विदेशी भर्ती एजेंसियों के विरुद्ध सक्रिय एवं प्रभावी भूमिका निभाए। पत्र भेजने के अलावा भंडारी ने फोन पर विदेश मंत्रालय में सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन से लंबी चर्चा भी की । भंडारी ने कहा- पिछले कई दशकों में उन्होंने देशभर के सैकड़ों संकटग्रस्त भारतीयों की सहायता की है, जिनमें बड़ी संख्या उन लोगों की रही, जिन्हें विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगा गया। अनेक मामलों में लोगों से लाखों रुपए लेकर उन्हें मध्य-पूर्व सहित अन्य देशों में भेजा गया, जहां उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए, वेतन नहीं दिया गया तथा अमानवीय परिस्थितियों में काम करने को मजबूर किया गया। कई मामलों में लोगों को विदेश भेजा ही नहीं गया। भर्ती एजेंट का अनिवार्य सत्यापन हो उन्होंने सुझाव दिया कि विदेश भेजने वाले प्रत्येक भर्ती एजेंट का अनिवार्य सत्यापन हो, सभी अधिकृत एजेंसियों का राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस बनाया जाए, प्रत्येक एजेंसी से पर्याप्त बैंक गारंटी या सुरक्षा राशि ली जाए तथा सभी शिकायतों की त्वरित जांच के लिए फास्ट ट्रैक व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही प्रत्येक प्रवासी श्रमिक को सरकार द्वारा सत्यापित रोजगार अनुबंध, प्रस्थान-पूर्व प्रशिक्षण तथा 24×7 बहुभाषी हेल्पलाइन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। भंडारी ने विशेष रूप से सुझाव दिया कि राजस्थान पुलिस को विदेशी रोजगार धोखाधड़ी और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज कर शीघ्र जांच एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने अपने पत्र में एक पुराने प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा- राजस्थान में मानव तस्करी के एक मामले में लंबे प्रयासों के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी थी। बाद में तत्कालीन मुख्य सचिव श्री सी. के. मैथ्यू के हस्तक्षेप के बाद ही एफआईआर दर्ज हुई और पीड़ितों की ठगी गई राशि वापस दिलाई जा सकी। भंडारी ने कहा कि इस अनुभव ने यह सिद्ध किया कि यदि प्रशासन और पुलिस समय पर कार्रवाई करें तो पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सकता है। इस संबंध में उन्होंने आवश्यक दस्तावेज भी पत्र के साथ संलग्न किए हैं। भंडारी ने विश्वास व्यक्त किया कि विदेश मंत्रालय, राजस्थान सरकार और राजस्थान पुलिस के समन्वित प्रयासों से मानव तस्करी तथा विदेशी रोजगार धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा और विदेशों में रोजगार के लिए जाने वाले भारतीयों की सुरक्षा और अधिकारों को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा। सुझाव 1. विदेश में नौकरी संबंधी जो भी विज्ञापन समाचार पत्रों, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या अन्य माध्यमों से प्रकाशित हों, उनकी स्थानीय पुलिस द्वारा तत्काल जांच की जाए कि संबंधित एजेंसी भारत सरकार से अधिकृत है या नहीं। 2. यदि कोई अनधिकृत एजेंट, मानव तस्कर या “कबूतरबाज” सक्रिय पाया जाए तो उसके विरुद्ध तुरंत एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि और लोग ठगी का शिकार न हों। 3. प्रत्येक जिले में विदेशी रोजगार धोखाधड़ी एवं मानव तस्करी से संबंधित मामलों के लिए एक नोडल पुलिस अधिकारी नियुक्त किया जाए। 4. राजस्थान पुलिस, राज्य सरकार एवं विदेश मंत्रालय के समन्वय से पंचायतों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, आईटीआई, रोजगार कार्यालयों तथा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ। 5. राजस्थान पुलिस, विदेश मंत्रालय, प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स, इमिग्रेशन विभाग तथा विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों/वाणिज्य दूतावासों के बीच नियमित समन्वय स्थापित किया जाए, जिससे रोकथाम, बचाव एवं दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।