जंगली बिल्ली एशियाई कैरेकल की गिरती हुई संख्या को संभालने के लिए रणभंभौर में कैरेकल कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। बुधवार को रणथंभौर टाइगर रिज़र्व में ‘राजस्थान में कैरेकल संरक्षण’ विषय पर वर्कशॉप हुई, जिसमें इसकी शुरुआत की गई। वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य एशियाई कैरेकल के संरक्षण पर केंद्रित रहा। कैरेकल एक दुर्लभ एवं कम दिखाई देने वाली जंगली बिल्ली है, जो पहले राजस्थान के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती थी। वर्तमान में आवास क्षरण, क्षेत्रीय विखंडन और शिकार की कमी के कारण इसकी संख्या में गिरावट आई है, जिससे इसके संरक्षण की जरूरत बेहद महत्वपूर्ण हो गई। वर्कशॉप के दौरान कैरेकल की वर्तमान स्थिति, वितरण एवं उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा की गई। साथ ही इसके आवास, पारिस्थितिकी एवं जनसंख्या प्रवृत्तियों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रोजेक्ट कैरेकल के उद्देश्य के बारे में बताया ‘प्रोजेक्ट कैरेकल’ के उद्देश्य, कार्यप्रणाली एवं समय-सीमा का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इस परियोजना का लक्ष्य राज्य में कैरेकल की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, महत्वपूर्ण आवासों की पहचान एवं संरक्षण, मॉनिटरिंग और अनुसंधान प्रणाली को सुदृढ़ बनाना और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ाना है। कार्यशाला में मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में संरक्षण की चुनौतियों और सामुदायिक सहभागिता पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस परियोजना की प्रमुख अनुसंधानकर्ता (Principal Investigator) डॉ. शोमिता मुखर्जी हैं। जबकि डॉ. अयान साधु एवं डॉ. धर्मेन्द्र खांडल, सह-अनुसंधानकर्ता (Co-PI) के रूप में कार्य कर रहे हैं। राजस्थान वन विभाग द्वारा SACON और टाइगर वॉच के सहयोग से संचालित यह परियोजना राज्य की जैव विविधता संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव भविष्य में प्रभावी कार्यनीतियों का रूप लेंगे और राजस्थान में कैरेकल के दीर्घकालीन संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। यह लोग रहे मौजूद कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. जी.एस. भारद्वाज एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरूण प्रसाद सहित राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य, विभिन्न टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, वन मण्डल अधिकारी और विशेषज्ञ डॉ. शोमिता मुखर्जी, डॉ. अयान साधु, डॉ. धमेन्द्र खांडल और बालेन्दु सिंह भी शामिल हुए।