चीते के डर से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। उनकी पढ़ाई बिल्कुल ठप हो गई है। खेतों में निराई- गुड़ाई और सिंचाई का काम रुक गया है। अब अकेले जाने में डर लगता है। यह खौफ उन किसानों के चेहरों पर देखा जा सकता है, जो सवाई माधोपुर जिले के कैलाशपुरी, दूमोदा और मौजीपुरा गांव में रहते हैं। ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। बच्चे से लेकर महिलाएं तक घर में कैद रहने को मजबूर हैं। पुरुष खेतों तक नहीं जा पा रहे हैं। खेती-बाड़ी चौपट हो रही है। इन सबकी वजह एक चीता है। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से आया चीता (KP-2) रणथंभौर टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों में शाम से लेकर आधी रात तक घूम रहा है। करीब 5 हजार की आबादी वाले इन तीनों गांवों के लोग दहशत में हैं। कामकाज ठप, बच्चों की पढ़ाई छूटी कैलाशपुरी गांव के दिलकुश गुर्जर कहते हैं- खेतों में जाना मुश्किल हो गया है। खेती का काम नहीं हो पा रहा है। हर समय डर बना रहता है कि कहीं चीता सामने न आ जाए। अब खेत सूने रहने लगे हैं। चीते के डर से खेतों की ओर कोई नहीं जा रहा। मौजीपुरा गांव में हालात और गंभीर हैं। यहां बच्चों का स्कूल जाना तक बंद हो गया है। परिजन उन्हें घर से बाहर भेजने में डर रहे हैं। ग्रामीण सुरज्ञान गुर्जर का कहना है- चीता कई बार उनकी खातेदारी जमीन में दिखाई दिया है। रेंजर और डीएफओ को शिकायत दी, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला है। डर के कारण महिलाएं और बच्चे घरों में ही रहते हैं। पुरुषों को अगर बाहर निकलना भी पड़ता है तो ग्रुप बनाकर निकलते हैं। भरत लाल गुर्जर के अनुसार, सिंचाई बाधित होने से फसलें सूखने लगी हैं, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। फसल बर्बाद होने से दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा। 20 दिनों में 150 किमी का सफर तय किया 14 अप्रैल को पालीघाट क्षेत्र के अजीतपुरा गांव में चीते की पहली बार लोकेशन मिली थी। इसके बाद से वह आसपास के गांवों में लगातार घूम रहा है। वह करीब 150 किलोमीटर का सफर तय कर चुका है। इनमें अजीतपुरा, लहसोड़ा, लक्ष्मीपुरा, भैरूपुरा, जैतपुर, हलौंदा, कुशालीपुरा, जोन नंबर 9,7, 8 प्रमुख तौर पर शामिल हैं। इसके बाद श्याम वाटिका, संग्रामपुरा, नीमली, सीतामाता, कालीभाट, हिंदवाड़, दूमोदा, कैलाशपुरी, मौजीपुरा में भी उसका मूवमेंट रिकॉर्ड किया गया है। रणथंभौर का लैंड स्केप आ रहा पसंद वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार- रणथंभौर का लैंड स्केप चीते को पसंद आ रहा है। यह एक ऐसा इकोसिस्टम है, जिसमें खुले घास के मैदान, हल्की झाड़ियां, पठारी इलाका और नदी घाटियां शामिल हैं। यह चीतों को पसंद आता है, क्योंकि उन्हें शिकार करने में इन इलाकों में आसानी रहती है। इसी कारण चीता लगातार आबादी वाले इलाकों में मूवमेंट कर रहा है। रात के अंधेरे में ही निकलता है बाहर रणथंभौर डीएफओ मानस सिंह का कहना है- KP2 सिर्फ अंधेरे में ही शिकार करने बाहर निकलता है। वह शाम 7 से लेकर रात 11 बजे तक बाहर निकलता है। चीता रात के समय मध्य प्रदेश के कूनो से रणथंभौर पहुंचा था। उसके रात की मूवमेंट के कारण विभागीय टीम को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि एक चार सदस्यों की टीम लगातार इसे ट्रैक कर रही है, जिससे आबादी इलाकों में इसे पकड़ा जा सके। ----------- यह खबर भी पढ़िए… एक-दूसरे को मार रहे बाघ-बाघिन:मां से अलग होते ही हो जाते हैं हमलावर, 9 साल में 9 की मौत, जानें- क्या है कारण राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अब बाघों के लिए 'घर' छोटा पड़ने लगा है। अपनी सल्तनत (टेरिटरी) कायम करने की होड़ में बाघ एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए