पत्नी की टीबी की बीमारी के चलते पति कछुआ लाने जयपुर से सवाई माधोपुर की बनास नदी तक पहुंच गया। उसे हकीम ने बताया था कि पत्नी की टीबी ठीक करनी है तो कछुए का मांस खिलाना होगा। इसके बाद युवक ने बनास नदी में मछली के कांटे से कछुए को पकड़ लिया। शिकार की सूचना पर वन विभाग इसके पीछे लग गई। आरोपी बोरे में डालकर कछुए को ले जा रहा था। नाकाबंदी कर पकड़ा और आरोपी के कब्जे से कछुए को छुड़वाया तो पता चला ये दुर्लभ कछुआ फ्लैपशेल प्रजाति का निकला।कछुए के मुंह में कांटा फंसा था। इसके बाद रणथंभौर टाइगर रिजर्व में कछुए का 45 मिनट ऑपरेशन कर उसका इलाज किया गया। मामला जिले के मलारना डूंगर इलाके में बनास नदी का है। 2 पॉइंट में समझिए पूरी कहानी 1. नाकाबंदी की थी: रणथंभौर रिजर्व के तालड़ा रेंजर रामखिलाड़ी मीणा ने बताया- रणथंभौर टाइगर रिजर्व की वन विभाग टीम को रविवार को सूचना मिली थी कि जिले के मलारना डूंगर इलाके में बनास नदी से दो लोग कछुए का शिकार कर रहे हैं। सूचना पर वनपाल आरती शर्मा नेतृत्व में टीम श्यामोली-बिलोली कच्चे रास्ते पर पहुंची और वहां नाकाबंदी कर दी। 2. बोरे में डालकर ले जा रहा था: इस दौरान एक बाइक पर दो लोग एक बोरा लेकर आते दिखे। इनमें से एक आरोपी वन विभाग की टीम को देख वहां से भाग निकला। जबकि टीम ने दूसरे आरोपी को पकड़ लिया। बोरे की तलाशी लेने पर उसमें इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति का एक कछुआ मिला। जिसमें मछली का कांटा फंसा हुआ था। टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के फरार साथी की तलाश की जा रही है। बोला-पत्नी को टीबी की बीमारी पकड़ा गया आरोपी राजू (35) पुत्र गोपीराम बावरिया जयपुर के बिंदायका थाना इलाके के नंदगांव का रहने वाला है। उसने टीम को पूछताछ में बताया कि उसकी पत्नी को टीबी की बीमारी है। वह लंबे समय से बीमार चल रही है। पत्नी को एक हकीम को दिखाया था। हकीम ने राजू को सलाह दी कि पत्नी को कछुए का मांस खिलाएगा तो टीबी से मुक्ति मिल जाएगी। इसके बाद वह कछुए का शिकार करने के लिए रविवार को सवाई माधोपुर के मलारना डूंगर इलाके में बनास नदी के किनारे पहुंच गया। 45 मिनट चला कछुए का ऑपरेशन इधर देर शाम रणथंभौर टाइगर रिजर्व के वेटरनरी हॉस्पिटल में इस कछुए का इलाज किया गया। रणथंभौर टाइगर रिजर्व वेटरनरी हॉस्पिटल के उप निदेशक डॉ. सीपी मीणा ने बताया यहां करीब 45 मिनट तक कछुए की सर्जरी चली। यहां टीम ने सर्जरी कर मछली पकड़ने के कांटे को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। ऑपरेशन के बाद कछुए को आवश्यक दवाइयां दी गईं और उसकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। वन विभाग के अनुसार, कछुए के पूरी तरह स्वस्थ होने पर सोमवार को उसे उसकी प्राकृतिक टेरिटरी में रिलीज किया जाएगा।