रणथंभौर टाइगर रिजर्व के वेटरनरी हॉस्पिटल में एक दुर्लभ प्रजाति कछुए का रविवार देर शाम ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान जनरल एनेस्थीसिया देकर कछुए के ऊपरी जबड़े में फंसा मछली पकड़ने का कांटा धागे सहित सुरक्षित रूप से निकाल लिया गया। रणथंभौर टाइगर रिजर्व वेटरनरी हॉस्पिटल के उप निदेशक डॉ. सीपी मीणा ने बताया कि नाका मलारना स्टेशन की वनपाल आरती शर्मा ने वन क्षेत्र से एक कछुए का रेस्क्यू कर उसे वेटरनरी हॉस्पिटल लाया गया। यहां CCF (मुख्य वन संरक्षक) शारदा प्रताप सिंह के निर्देशन और DFO (उप वन संरक्षक) मानस सिंह के मार्गदर्शन में डॉ. वेटरनरी हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने कछुए का ऑपरेशन किया। 45 मिनट की सर्जरी के बाद मछली का कांटा निकाला डॉ. सीपी मीणा ने बताया- यहां करीब 45 मिनट तक कछुए की सर्जरी चली। यहां टीम ने सर्जरी कर कांटे को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। ऑपरेशन के बाद कछुए को आवश्यक दवाइयां दी गईं और उसकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। वन विभाग के अनुसार, कछुए के पूरी तरह स्वस्थ होने पर सोमवार को उसे उसकी प्राकृतिक टेरिटरी में रिलीज किया जाएगा। इस संबंध में DFO मानस सिंह ने आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कछुए ‘इकोसिस्टम इंजीनियर’ माने जाते हैं, जो जलीय और स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कछुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की पहली अनुसूची के अंतर्गत संरक्षित प्रजाति है, जिसका संरक्षण करना सरकार और समाज दोनों की नैतिक व कानूनी जिम्मेदारी है।