भूख हड़ताल पर बैठे 3 अभ्यर्थियों को भरतपुर के RBM अस्पताल में भर्ती किया गया है। तीनों को सोमवार की शाम पुलिस ने उठाया था, जिसके बाद उन्हें बयाना, फिर जिला हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। तीनों 372 पदों पर भर्ती की मांग को लेकर 2 मई से भूख हड़ताल पर बैठे थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि कलेक्टर ने 1 मई तक सरकार से वार्ता का समय मांगा था। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। 372 पदों पर भर्ती की मांग नीट अभ्यर्थी राजवीर गुर्जर ने बताया कि साल 2018 की रीट भर्ती को लेकर 3 अभ्यर्थी पीलूपुरा में भूख हड़ताल पर बैठे थे। 372 पदों पर भर्ती की मांग है। सरकार ने हमें खुद लिखकर दिया है कि वह 372 पदों पर जल्दी कर देंगे, लेकिन 7 साल से पदों पर भर्ती नहीं हुई है, इसलिए हमें अनशन पर बैठना पड़ा। सोमवार को प्रशासन के अधिकारी हमें अनशन से जबरन उठाकर बयाना अस्पताल ले गए। RBM अस्पताल में भर्ती करवाया अभ्यर्थियों का कहना है कि बयाना से हमें भरतपुर के RBM अस्पताल भेज दिया गया। सरकार जब भर्ती नहीं करवाती तो, हमें समय क्यों दिया गया है। इससे पहले कांग्रेस सरकार में 3 बार समझौते हुए। 8 जून 2025 को बीजेपी से समझौता हुआ था। सरकार ने 8 महीने का समय मांगा था। उस समय को 10 महीने पूरे होने वाले हैं। सरकार ने 3 सदस्यीय कमेटी MBC वर्ग के लिए बनाई है। उनके साथ मीटिंग नहीं करवाई जाती। यह संवेदनहीनता की हद है। हमें इसलिए अनशन पर बैठना पड़ा है। सरकार खुद कह रही है कि रात 2 बजे बुलाकर 2 लड़कों को जॉइनिंग दे दी है। सरकार गलती मान रही है। उसके बाद भी हमें भर्ती नहीं किया जा रहा था तो हमारे साथ कहीं न कहीं द्वेषता की जा रही है। इस चीज को लेकर हम समाज के बीच जाएंगे। 23 को समाज के लोग होंगे इकट्ठे 23 मई को समाज इकट्ठा होगा, वहीं इसका निर्णय करेगा। उस दिन शहीदों की बरसी है। सोमवार की शाम पुलिस ने हमें पीलूपुरा से जबरन उठाया है। हमने पुलिस को जाने के लिए मना कर दिया था। सरकार हमारी मांग मान लेगी तो, अनशन तोड़ दिया जाएगा। जबकि तबीयत खराब भी नहीं हुई थी, उसके बाद भी 3 अभ्यर्थियों को वहां से उठा लिया गया। 2 मई से शुरू हुई भूख हड़ताल 31 मार्च से रीट अभ्यर्थियों ने धरना शुरू किया था। 8 अप्रैल को महापंचायत का ऐलान किया गया था। किसी कारणवश महापंचायत कैंसिल कर दी गई। इसके बाद कलेक्टर से वार्ता हुई। कलेक्टर ने सरकार से वार्ता के लिए 1 मई तक का समय मांगा था, लेकिन कलेक्टर की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। उसके बाद 2 मई को फिर से धरना शुरू कर दिया गया था।