राजस्थान हाईकोर्ट ने कुक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती व नियुक्ति प्रक्रिया में दो बड़े बदलाव किए हैं। इन महत्वपूर्ण संशोधनों के तहत अब हाईकोर्ट में कुक बनने के लिए एक साल के नियमित कुकिंग डिप्लोमा की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। इसके बजाय संबंधित न्यायाधीश के यहां खाना बनाने और रसोई का कार्य के अनुभव को भी पात्रता में शामिल किया गया है। वहीं, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति के नियमों में किए गए बदलावों के तहत अब प्रत्येक कार्यरत न्यायाधीश अपने पूरे कार्यकाल के लिए दो अर्दली/चपरासी नामित कर सकेंगे। इन संशोधित नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अनुभव को औपचारिक योग्यता के बराबर मान्यता राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ‘राजस्थान हाईकोर्ट स्टाफ सर्विस रूल्स, 2002’ के तहत भर्ती और योग्यता संबंधी प्रावधानों में यह संशोधन किया गया है। पूर्व में कुक पद के लिए न्यूनतम एक वर्ष के नियमित कुकिंग कोर्स का डिप्लोमा होना अनिवार्य शर्त थी, जिसे अब हटा दिया गया है। अब राज्य सरकार, केंद्र सरकार या सरकारी उपक्रम के साथ-साथ संबंधित न्यायाधीश के यहां कार्य करने से प्राप्त अनुभव को भी मान्यता दी जाएगी। हाईकोर्ट का यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से न्यायाधीशों के यहां भोजन बनाने का कार्य तो कर रहे थे, लेकिन डिप्लोमा न होने के कारण कुक पद के पात्र नहीं माने जाते थे। अब अनुभव को महत्व मिलने से उनके लिए नियमित नियुक्ति का मार्ग आसान होगा। हालांकि, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में से कुक पद के लिए नामित व्यक्ति की नियुक्ति से पहले मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित एक विशेष समिति उसकी स्क्रीनिंग करेगी, जो यह सुनिश्चित करेगी कि संबंधित कर्मचारी के पास निर्धारित शैक्षणिक और अन्य आवश्यक योग्यताएं मौजूद हैं। 3 साल की संतोषजनक सेवा के बाद कुक पद के लिए नामांकन संशोधित नियमों के अनुसार, हाईकोर्ट के प्रत्येक कार्यरत न्यायाधीश अपने पूरे कार्यकाल के लिए दो अर्दली या चपरासी नामित कर सकेंगे। जिन न्यायाधीशों ने पहले से एक कर्मचारी नामित कर रखा है, वे अब एक अतिरिक्त कर्मचारी भी नामित कर पाएंगे। मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक न्यायाधीश को जोधपुर प्रधान पीठ और जयपुर पीठ के लिए अलग-अलग दो-दो कर्मचारियों को नामित करने का विशेष अधिकार दिया गया है। इन नामित कर्मचारियों में से किसी एक को तीन वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी होने और पद पर पुष्टि होने के बाद ही कुक पद के लिए नामित किया जा सकेगा। जजों के तबादले के बाद भी सेवा बरकरार नियमों में यह भी साफ प्रावधान किया गया है कि यदि किसी न्यायाधीश का तबादला अन्यत्र हो जाता है या वे उच्च न्यायालय के बाहर पदोन्नत होते हैं, तो उनके साथ जुड़े दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उनकी सेवानिवृत्ति तक उनके साथ बने रहेंगे। वहीं, न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने की स्थिति में उनके द्वारा नामित एक कर्मचारी को उनके अथवा उनके जीवनसाथी के पूरे जीवनकाल तक सेवा जारी रखने की अनुमति होगी। इसके अलावा, यदि कोई नामित कर्मचारी इस्तीफा देता है, सेवा छोड़ता है, हटाया जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो संबंधित न्यायाधीश नए कर्मचारी को नामित करने के हकदार होंगे। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कुक के रिक्त पद न्यायाधीशों द्वारा किए गए नामांकनों की संख्या से कम होते हैं, तो आवश्यकता पड़ने पर पात्रता संबंधी शर्तों में मामले-दर-मामले के आधार पर छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है।