भारत के सुप्रसिद्ध वास्तुकार आशीष सोमपुरा मंगलवार को गंगा मंदिर, लक्ष्मण मंदिर और बिहारी जी मंदिर पर हो रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। मंदिरों पर कार्य करने वाले कारीगरों के काम को बारीकी से देखा। काम में कमी होने पर खुद से एक-एक पट्टी के डिजाइन के बारे में समझाया। भास्कर से बातचीत में सोमपुरा ने बताया कि 2015 में गंगा मंदिर, बिहारी जी मंदिर व लक्ष्मण मंदिर के आर्किटेक्ट का कार्य किया था। 2015 ही में तीनों ही मंदिरों की डीपीआर बना ली गई थी, जिसमें कुछ संशोधित कर किया जा रहा है। बंशी पहाड़पुर के बालू पत्थर से जहां राम मंदिर का निर्माण हुआ था तो उसी बालू पत्थर से अब गंगा मंदिर का शिखर बनेगा। दोनों ही अलग-अलग शैलियों के मंदिर है। भरतपुर में ज्यादातर हवेली की डिजाइन हैं। अब तक ज्यादातर हमने नागर शैली के मंदिरों को डिजाइन किया है। गंगा मंदिर यूरोपीय और दक्षिण भारतीय शैली का है उसी शैली में मंदिर को बनाया जाएगा। पहली बार भरतपुर में काम कर रहे सोमपुरा संवारिया सेठ व सालासर बालाजी का भी काम कर चुके हैं। वे अब तक 131 से अधिक मंदिरों की डिजायन का कार्य कर चुके हैं। बिहारी जी मंदिर पर मुख्य द्वार को लेकर असमंजस, 2 डिजाइन में से एक भी फाइनल नहीं... बिहारी जी मंदिर पर पुराने पौराणिक दरवाजे प्रमुख द्वार को जमींदोज करने के बाद मुख्य द्वार बनाने पर अभी असमंजस है। वास्तुकार आशीष सोमपुरा के द्वारा दो मुख्य दरवाजों को तैयार किए गए हैं, जिसमें से अभी एक मुख्य द्वार तय किया जाएगा, जिसमें अभी असमंजस है जल्द ही मुख्य द्वार फाइनल किया जाएगा।