जन्म के बाद गर्भनाल में बचा रक्त नवजातों के लिए जीवनदायी साबित हो रहा है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय, सांगानेरी गेट सहित महाराष्ट्र के चार बड़े हॉस्पिटल और अमेरिका के दो अमेरिका के सेंटरों पर हुए शोध में सामने आया कि Umbilical Cord Milking (UCM) तकनीक से गर्भनाल का रक्त नवजात को देने पर दिमाग तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर हुई, एनीमिया कम मिला और शारीरिक व न्यूरो-डवलपमेंट भी बेहतर रहा। यह शोध अप्रैल-2026 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल BMC पेडियाट्रिक्स में प्रकाशित हो चुका है। शोधकर्ताओं में डॉ. आशा वर्मा, डॉ. सीमा मेहता और डॉ. सुनील गोठवाल शामिल हैं। शोध के दौरान 76,500 गर्भवतियों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से जन्म के तुरंत बाद विशेष देखभाल की जरूरत वाले 3,442 नवजातों का चयन किया। 1,721 नवजातों को UCM तकनीक से गर्भनाल का 30 से 50 मिलीलीटर रक्त दिया, जबकि शेष 1,721 को सामान्य उपचार मिला। BMC पेडियाट्रिक्स में प्रकाशित अध्ययन में UCM तकनीक के बेहतर नतीजे क्या है UCM तकनीक?; अंबलिकल कॉर्ड मिल्किंग में गर्भनाल काटने से पहले हल्के दबाव से निचोड़कर उसमें मौजूद रक्त कुछ सेकंड में नवजात के शरीर में पहुंचाया जाता है। इससे अतिरिक्त रक्त, ऑक्सीजन, आयरन और स्टेम सेल्स मिलते हैं। क्या है कॉर्ड ब्लड?; जन्म के बाद गर्भनाल और प्लेसेंटा में बचा रक्त कॉर्ड ब्लड कहलाता है। यह स्टेम सेल्स से भरपूर होता है और भविष्य में ल्यूकेमिया, थैलेसीमिया व कुछ कैंसर के उपचार में उपयोगी माना जाता है। भास्कर EXPLAINER - नहीं रोने वाले नवजात शामिल 1. शोध में डिलीवरी के बाद होने वाले जो नवजात रोया नहीं, उन्हें ही गर्भनाल का खून चढ़ाया गया। सात सेन्टरों पर कुल 3442 में से 1721 नवजातों को खुद का 30 से 50 एमएल खून ट्रांसफर करके दो साल तक एनालिसिस किया। जिनके खून ट्रांसफर किया गया, वो अन्य की तुलना में हर तरह से हैल्दी मिलें। जिसमें खून की मात्रा, बीमारी, वजन, शरीर के अंगों का विकास पूरी तरह फिट पाए गए। 2. गर्भनाल: यह 25 से 100 सेमी लंबी होती है। एक सेमी में .75 एमएल खून होता है। अंबलिकल कार्ड के खून से निकाली कोशिकाओं में 200 कोशिकाएं विकसित करने की क्षमता होती है। मौजूदा स्थिति में शिशु के जन्म के बाद गर्भनाल को काटकर फेंक दिया जाता है या , में गाढ़ देते है। 3. अंबलिकल कार्ड मिल्किंग: गर्भनाल को दबाते हुए बच्चे में खून चढ़ाने को यूसीएम के नाम से जानते है। गर्भनाल काटने से पहले मौजूद रक्त को कुछ सेकंड के अंदर नवजात को ट्रांसफर किया जाता है। बच्चे को अतिरिक्त खून, आक्सीजन, आयरन तथा स्टेम सेल्स भी मिल सकते है। 4. खून की प्राकृतिक आपूर्ति: जन्म के तुरंत बाद गर्भनाल न काटे। इससे पोषक तत्वों और ऑक्सीजन से भरपूर खून बच्चे के शरीर में चला जाता है। 5. दिमाग में ऑक्सीजन की सही मात्रा: बच्चे के दिमाग में ऑक्सीजन का प्रवाह होने से मानसिक और न्यूरोलॉजिकल विकास जल्दी होगा। 6.एनीमिया (खून की कमी) से बचाव: शिशुओं में शुरुआती महीनों में होने वाली खून की कमी की समस्या इससे काफी हद तक दूर हो जाती है। गर्भनाल का रक्त नवजातों के लिए संजीवनी की तरह है। 7 सेंटरों पर हुए शोध के नतीजे विशेष रूप से उन बच्चों के लिए उम्मीद जगाते हैं, जो जन्म के बाद नहीं रोते और दिमाग में ऑक्सीजन की कमी से प्रभावित होते हैं। -डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज