शहर का केंद्रीय रोडवेज बस स्टैंड हीरादास पिछले करीब एक साल से अस्थायी इंतजामों के सहारे चल रहा है। जर्जर और खतरनाक घोषित मुख्य भवन को बेरिकेडिंग कर सील कर दिया गया है, जिसके बाद यात्रियों की आवाजाही रोककर सामने टिन शेड में वैकल्पिक बस स्टैंड संचालित किया जा रहा है। हालात यह हैं कि संभाग के इस सबसे बड़े अंतरराज्यीय बस अड्डे पर न यात्रियों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही धूप-बरसात से बचाव के इंतजाम। सरकार ने यहां करीब 65 करोड़ रुपए की लागत से स्मार्ट सिटी मॉडल पर आधुनिक बस स्टैंड विकसित करने की योजना बनाई है। पहले इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने की चर्चा थी, लेकिन अब इसी स्थान पर सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर जोधपुर की तर्ज पर नया बस स्टैंड विकसित करने की तैयारी चल रही है। प्रस्तावित बस स्टैंड में वेटिंग लाउंज, फूड कोर्ट, शॉपिंग एरिया और आधुनिक यात्री सुविधाएं विकसित की जानी हैं। हालांकि परियोजना का अंतिम प्रारूप, और टेंडर प्रक्रिया को लेकर निर्णय अभी कैबिनेट स्तर पर लंबित है। हर दिन 10 से 15 हजार यात्री इस अस्थायी बस स्टैंड से सफर कर रहे हैं। त्योहारों और प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान यह संख्या 20 से 30 हजार तक पहुंच जाती है। यहां राजस्थान के विभिन्न डिपो के अलावा यूपी, हरियाणा और दिल्ली रूट की करीब 250 से 300 बसों का संचालन होता है। दूसरे राज्यों से आने वाले यात्री घंटों बस बदलने के इंतजार में रुकते हैं, लेकिन बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। तेज धूप में टिन तप जाती है और पंखे गर्म हवा देते हैं। पीने के ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था नहीं है। अस्थायी व्यवस्था के बीच सुरक्षा इंतजाम भी सवालों में हैं। यात्रियों की भीड़ बसों के आगे-पीछे घूमती रहती है। हाल ही में बस बैक करते समय एक वृद्ध की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। बसों की आवाजाही के दौरान किसी प्रकार की गाइडिंग या ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था नजर नहीं आती। रोडवेज कर्मी भी परेशान, बोले जल्दी तैयार हो नया बस स्टैंड रोडवेज बस स्टैंड पर आमजन व यात्रियों के साथ-साथ रोडवेज कर्मी भी परेशान हैं। राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फेडरेशन के संभाग प्रभारी मैंबर सिंह व भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष धर्म सिंह का कहना है कि यात्रियों के साथ-साथ रोडवेज कर्मी भी असुविधा के बीच काम कर रहे हैं, टिन शेड में बुकिंग की ठीक से व्यवस्था नहीं है। इसलिए जल्दी से जल्दी नया बस स्टैंड का निर्माण कराया जाए। भरतपुर संभाग में 3 नए बस स्टैंड भी बनेंगे भरतपुर संभाग में कामां, रूपवास और डीग में नए बस स्टैंड बनाए जाएंगे। इनमें कामां के लिए 1.50 करोड़, रूपवास के लिए 1.50 करोड़ और डीग के लिए 2.50 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निर्माण राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा कराया जाएगा। नदबई सहित कई पुराने बस स्टैंडों के होंगे सुधार कार्य नदबई बस स्टैंड पर 50 लाख और धौलपुर बस स्टैंड पर 1 करोड़ रुपए खर्च कर सुधार कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य बस अड्डों के रिनोवेशन की भी योजना है। पीपीपी मोड पर भरतपुर सहित 9 और शहरों में बनेंगे आधुनिक बस स्टैंड राज्य सरकार ने भरतपुर, अजमेर, सीकर सहित 9 शहरों में पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बस स्टैंड विकसित करने की योजना बनाई है। इन्हें यातायात केंद्र के साथ व्यावसायिक गतिविधियों और रोजगार हब के रूप में विकसित किया जाएगा। “भरतपुर बस स्टैंड को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने की योजना पर मुख्यालय स्तर पर काम चल रहा है। परियोजना से जुड़े प्रारूप और अन्य प्रक्रियाएं वहां से तय की जानी हैं।”
- राकेश सैनी सीएमडी, भरतपुर डिपो