भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में अपने बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाने का सपना देख रहे अभिभावकों के लिए राह आसान नहीं दिख रही है। आवेदन की प्रक्रिया से लेकर स्कूलों की चौखट तक, अभिभावक सिस्टम की पेचीदगियों और स्कूलों के नए-नए बहानों से जूझ रहे हैं। जिले में 9 अप्रैल तक दस्तावेजों में संशोधन और री-अपलोड का अंतिम अवसर था, अब उनके आवेदनों की जांच संबंधित सीबीईओ की ओर से की जाएगी। जिन अभ्यर्थियों के आवेदन सही होंगे उन्हें 17 अप्रैल तक प्रवेश दिया जा सकेगा। शेष अभ्यर्थियों को सीटें रिक्त रहने पर सेकंड चरण का अलॉटमेंट 21 अप्रैल को होगा। 'नवीन लखारा तीसरी कक्षा तक आरटीई के तहत ही एक निजी स्कूल में पढ़ रहे थे। अब चौथी कक्षा में प्रवेश का समय आया तो स्कूल प्रशासन ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि "अभी नॉन-आरटीई बच्चों के प्रवेश नहीं हुए हैं, इसलिए एडमिशन नहीं देंगे।" स्कूल का कहना है कि प्रवेश जुलाई में होंगे, जबकि नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। ऐसे में छात्र की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। सक्षम सेन के मामले में उम्र की तकनीकी बाधा सामने आई है। सक्षम ने पीपी-5 प्लस की पढ़ाई पूरी कर ली थी, लेकिन पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आवश्यक 6 वर्ष की आयु में उसकी उम्र महज 3 महीने कम रह गई। नतीजा यह हुआ कि पोर्टल ने उसे फिर से उसी क्लास (हायर केजी) में डाल दिया। अभिभावक परेशान हैं कि उनका बच्चा एक ही क्लास दोबारा पढ़ने को मजबूर है, जिससे उसका एक साल बर्बाद हो रहा है। भीलवाड़ा नगर निगम क्षेत्र के सोनू कुमार जीनगर के पुत्र मिहिर का आवेदन दस्तावेजों में वार्ड संख्या की भिन्नता बताकर निरस्त कर दिया गया। सोनू का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से शहर में किराए पर रह रहे हैं। पिछले 10 सालों में दो बार वार्डों का परिसीमन हुआ, आधार और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों में अलग-अलग वार्ड अंकित हो गए। प्रशासनिक बदलावों की वजह से अब बच्चे को स्कूल एडमिशन नहीं दे रहा है। प्री-प्राइमरी में प्रवेशित विद्यार्थियों की फीस को लेकर राज्य सरकार ने अभी तक स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं किए हैं। यही कारण है कि अनेक निजी स्कूल इन कक्षाओं में जिन अभ्यर्थियों को सीट आवंटन हुआ है उन्हें प्रवेश नहीं देने के रास्ते ढूंढ रहे हैं। छोटे-मोटे कारणों से ही प्रथम चरण में निजी स्कूलों ने सैकड़ों की संख्या में आवेदन रिजेक्ट कर दिए हैं।