आठ महीने पहले परिवहन विभाग ने 7 डिजिट नंबर घोटाले की जांच रिपोर्ट जारी कर प्रदेशभर में करीब 9 हजार 500 नंबरों के गलत तरीके से बैकलॉग, वेरिफिकेशन और अप्रूवल कर आवंटित किए जाने का खुलासा किया था। जयपुर में 2129 नंबरों का गलत तरीके से आवंटन सामने आया था। इनमें से 250 नंबरों का सत्यापन नहीं हुआ तो इनकी आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) निरस्त कर दी गई थी। अब इसी मामले में नया मोड़ आ गया है। विभाग ने पांच महीने बाद उन्हीं वाहनों की आरसी दोबारा बहाल करनी शुरू कर दी है। 35 वाहनों की आरसी बहाल हो गई है। बाकी की प्रक्रिया चल रही है। बहाल हुए नंबरों में कई वीआईपी, कारोबारी, भाजपा से जुड़े नेता और वाहन डीलरों के हैं। आरसी बहाल पर विभाग का तर्क है कि वाहन मालिकों को 17 दिसंबर को वाहन के भौतिक निरीक्षण के लिए आरटीओ कार्यालय बुलाया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। 30 जनवरी 2026 को उनकी आरसी निरस्त कर दी गई। बाद में वाहन मालिकों ने आरटीओ के समक्ष अपील की। अपील पर दस्तावेजों और वाहन के भौतिक निरीक्षण में सब कुछ सही पाए जाने के बाद आरसी बहाल कर दी गई। जिनकी RC रद्द की थी, उन्हीं को सही बताकर बहाल किया केस 1; पहले निरस्त, फिर 4 माह बाद बहाल कार नंबर RRX-8802 की आरसी 30 जनवरी को डीटीओ ने गलत तरीके से नंबर आवंटन मानते हुए निरस्त कर दी। यह वाहन धनंजय सिंह पुत्र गजेंद्र सिंह के नाम दर्ज है। तीन महीने बाद 1 मई को आरटीओ ने नया आदेश जारी कर आरसी बहाल कर दी। केस 2; स्क्रैप सर्टिफिकेट के बाद बहाल कार RPH 4041 मैसर्स ऑरा अटायर के नाम दर्ज है। वाहन मालिक राजीव जिंदल ने सुनवाई में RPH 4041 और RJ60-CD-2441 के बीच नंबर स्वेपिंग की जानकारी देते हुए स्क्रैप सर्टिफिकेट दिया। कोई अनियमितता नहीं मिलने पर आरसी बहाल कर दी गई। केस 3; कई अन्य वाहनों की भी लौटी आरसी वाहन संख्या RNL 0542 मैसर्स प्रेम कृपा उद्योग, RNV 0034 आयुषी त्यागी, RJC 5700 मैसर्स स्प्रिंग डेल्स चिल्ड्रन्स स्कूल, कोटा और RNL 0015 यशोधर पांडे की आरसी भी 30 जनवरी को निरस्त की थी। बाद में भौतिक निरीक्षण में दस्तावेज सही बताते हुए आरसी बहाल कर दी। केस 4; स्वेपिंग बता कर लौटाई आरसी कार RNX 9909 मैसर्स सौभागमूल गोकुलचंद ज्वैलर्स के नाम दर्ज है। आरसी 30 जनवरी को निरस्त की। 18 मई को विभाग ने नए आदेश जारी कर आरसी बहाल कर दी। इसमें कहा कि RNX 9909 और RJ45-CV-1401 के बीच नंबर स्वेपिंग हुई थी, जो प्रक्रिया के तहत हुई। जयपुर में 2129 नंबर ​संदिग्ध ​मिले थे अक्टूबर 2025 में परिवहन विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हुआ। प्रदेशभर में करीब 9500 वाहनों को गलत तरीके से 7 डिजिट नंबर आवंटित किए जाने की बात सामने आई। जांच में बैकलॉग, वेरिफिकेशन और अप्रूवल प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। जयपुर आरटीओ में अकेले 2129 नंबर संदिग्ध पाए गए। 1879 मामलों का सत्यापन हुआ, जबकि 250 वाहनों का सत्यापन नहीं होने पर उनकी आरसी निरस्त कर दी गई। अब इन्हीं निरस्त वाहनों में से 35 से अधिक वाहनों की आरसी दोबारा बहाल की जा चुकी है।