कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पायलट ने कहा कि यह बेहद आश्चर्यजनक है कि सरकार न तो वांगचुक से बात करने को तैयार है और न ही उनकी मांगें मानने को तैयार है। उन्होंने कहा कि वांगचुक अपनी मांगों को लेकर 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान संसद तक जाना चाहते थे। 'सरकार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना ही नहीं चाहती' उन्होंने कहा कि सरकार बौखलाहट में काम कर रही है। जिन मुद्दों को लेकर पूरे देश में आक्रोश है, नौजवान आंदोलित हैं और कांग्रेस पार्टी के साथ राहुल गांधी भी सरकार से जवाब मांग रहे हैं कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। लेकिन इस्तीफा लेने के बजाय सरकार ने अनशन कर रहे व्यक्ति को जबरन उठाकर गिरफ्तार कर लिया। यह सरकार के काम करने के तरीके का एक उदाहरण है। सरकार न संवाद करना चाहती है, न चर्चा करना चाहती है, न मांगों पर ध्यान देना चाहती है और न ही शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी, लेकिन सरकार ने उसे जबरन खत्म करने की कोशिश की। इससे स्पष्ट है कि सरकार बैकफुट पर है, बौखलाई हुई है और कहीं न कहीं उसे जनभावनाओं का भी डर है। वांगचुक को गिरफ्तार करना दुर्भाग्यपूर्ण पायलट ने कहा कि सरकार जनता की मांगें पूरी नहीं करना चाहती और न ही उसने कोई संवाद स्थापित किया। यदि सरकार का कोई प्रतिनिधि वांगचुक से मिलकर बातचीत करता और उनकी मांगों पर चर्चा करता तो समाधान निकल सकता था। समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें गिरफ्तार करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले सरकार को उन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए थी, जिनको लेकर वांगचुक अनशन पर बैठे थे। यदि सरकार उनकी मांगें मान लेती तो वे स्वयं अनशन समाप्त कर देते। उन्होंने कहा कि उनकी मांगें अनुचित नहीं हैं। पूरा देश चाहता है कि शिक्षा व्यवस्था में लोगों का जो विश्वास कमजोर हुआ है, उसे बहाल किया जाए। जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर वे अनशन कर रहे थे। सरकार का रवैया यह दर्शाता है कि वह जनता की आवाज सुनने के मूड में नहीं है। लेकिन युवाओं और जनता का आक्रोश समाप्त होने वाला नहीं है। नौजवान जवाबदेही तय करना चाहते हैं और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा चाहते हैं। सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। पायलट ने कहा कि कांग्रेस का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए और सरकार को इसमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए। पंचायती राज एवं नगर निकाय चुनावों को लेकर पायलट ने कहा कि सरकार चुनाव नहीं कराना चाहती क्योंकि उसे पता है कि जनादेश उसके खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट भी पहले इस संबंध में टिप्पणी कर चुका है, लेकिन सरकार हर बार कोई न कोई बहाना बना लेती है। निर्माण कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश टोंक में मीडिया से बातचीत के दौरान सचिन पायलट ने कहा कि जिले में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई है। नर्सिंग कॉलेज, नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल सहित कई परियोजनाओं के कार्यों में कुछ देरी हुई थी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में निवेश हो चुका है, लेकिन कार्यों में विलंब हुआ है। अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया है कि अगले कुछ महीनों में सभी कार्य पूरे कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिले में बिजली और पेयजल दोनों प्रमुख मुद्दे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पेयजल आपूर्ति के अंतराल को कम किया जाए और अधिक से अधिक लोगों तक पानी पहुंचाया जाए। शहर में जलापूर्ति बढ़ाने के लिए टैंकरों की भी व्यवस्था की गई है। भीम सेना जिलाध्यक्ष के घर पहुंचकर जताई संवेदना सचिन पायलट ने टोंक में भीम सेना के पदाधिकारी अशोक बैरवा के निवास पर पहुंचकर उनकी माताजी स्वर्गीय शांति देवी, धर्मपत्नी स्वर्गीय रतनलाल सिसोदिया, के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर उन्हें इस कठिन समय में धैर्य और हिम्मत बनाए रखने का संबल दिया।