भील प्रदेश बनाने की मांग को लेकर भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने सलूम्बर के अतिरिक्त जिला कलेक्टर और झल्लारा तहसील मुख्यालय पर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें अलग भील प्रदेश राज्य के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। यह ज्ञापन ब्लॉक संयोजक गौतम लाल बुज के नेतृत्व में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपा गया। ज्ञापन में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के सीमावर्ती आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक नया 'भील प्रदेश राज्य' गठित करने की मांग की गई है। मोर्चा का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद भील सांस्कृतिक क्षेत्र विभिन्न राज्यों में बंट गया, जिससे आदिवासी समाज से जुड़े जल, जंगल, जमीन, भाषा, शिक्षा और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है। ज्ञापन में कुल 42 सूत्रीय मांगें उठाई गई हैं। इनमें भीली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना, 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करना, अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ाना और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय आदिवासी समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से शामिल हैं। पेयजल परियोजना की भी मांग इसके अतिरिक्त, आदिवासी क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं, वन संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि अधिकारों से संबंधित कई अन्य मांगें भी रखी गई हैं। विशेष रूप से, सलूम्बर जिले की जयसमंद झील से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के लिए पेयजल परियोजना स्वीकृत करने की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से उठाई गई। ज्ञापन सौंपते समय भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के जिला संयोजक रामलाल बरगोट, बीसीसी प्रभारी शंकर अहारी, कमलेश चौधरी, जगदीश दायमा टोड़ा, बीपीएमपी अध्यक्ष कालू लाल गामड़ा पाल और रमेश डामोर पायतालाब सहित कई सामाजिक विंग के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।