भारत के सबसे लोकप्रिय शेफ संजीव कपूर ने कहा- अगर भारत को स्वस्थ बनाना है तो घर के खाने को प्राथमिकता देनी होगी। बाहर का खाना व्यापार है, घर का खाना प्यार है। अब फैसला हमें करना है कि प्यार वाला खाना खाना है या व्यापार वाला। संजीव कपूर ने कहा- स्वस्थ जीवन की शुरुआत रसोई से होती है। उन्होंने लोगों से कुकिंग ऑयल की मात्रा आधी करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसा करने से स्वाद पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा- अगर गोल्डन ट्रायंगल में किसी शहर को असली गोल्ड कहा जाए तो वह जयपुर है। राजस्थान का खान-पान, संस्कृति और यहां के लोगों का अपनापन इस शहर को देश ही नहीं, दुनिया में अलग पहचान देता है। पढ़िए संजीव कपूर की दैनिक भास्कर से खास बातचीत… सवाल: जयपुर आकर किस तरह का खास जुड़ाव महसूस करते हैं? संजीव कपूर: पूरी दुनिया अगर भारत को देखती है तो एक गोल्डन ट्रायंगल के रूप में देखती है। दिल्ली, आगरा और जयपुर के रूप में। मैं हमेशा कहता हूं कि अगर उसमें गोल्ड कोई है तो वह जयपुर है। लोग इसे पिंकसिटी कहते हैं, लेकिन मेरे हिसाब से यह गोल्डन सिटी है। क्योंकि यहां पर जो सब कुछ है, चाहे खाना हो, कल्चर हो, बिल्डिंग्स हों और सबसे बड़ी बात राजस्थान के लोग, वही सबसे बड़ी खासियत है। दिल्ली अपनी जगह है, आगरा अपनी जगह है, लेकिन राजस्थान की बात ही कुछ और है। यहां का पूरा कल्चर है, इसे बहुत प्यार से संभालकर रखा गया है। इसलिए मुझे यहां आना बहुत पसंद है। कोई भी बहाना होता है, कुछ भी कार्यक्रम होता है तो मैं जल्दी से हां कर देता हूं। सवाल: यहां के खाने में एक शेफ के तौर पर आपको सबसे खास क्या लगता है? संजीव कपूर: जयपुर की बात करें तो जाहिर सी बात है कि यहां राजस्थानी खाना है, लेकिन ऐसा नहीं है कि पूरे राजस्थान में एक जैसा खाना होता है। राजस्थान के अलग-अलग इलाकों का अलग स्वाद है। लेकिन अगर पूरे राजस्थान का फ्लेवर कहीं एक जगह मिल सकता है, तो वह जयपुर है। यहां मेवाड़ का भी स्वाद मिलेगा, मारवाड़ का भी मिलेगा और बाकी सभी क्षेत्रों का भी मिलेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां एक्सीलेंस भी है। छोटी जगहों पर भी अच्छा खाना मिलेगा, सड़क पर भी अच्छा मिलेगा, घरों में तो बात ही कुछ और है। हवेलियों का खाना अलग है और बड़े होटलों का अलग। क्योंकि कल्चर का एक बहुत बड़ा हिस्सा खाना होता है। यहां सस्ते में भी बढ़िया खाना मिलेगा और महंगे में भी मिलेगा। मैं हमेशा कहता हूं कि खाना सिर्फ स्वाद नहीं होता। हमारे पांचों सेंसेस बहुत जरूरी है। अगर मैं राजस्थानी खाने की बात करूं तो सिर्फ स्वाद नहीं, वो दिखने में भी खूबसूरत है, खुशबू में भी शानदार है और जो क्रिस्पिनेस है, जो टेक्स्चर है, वह भी कमाल का है। मतलब पांचों सेंसेस को सेटिस्टफाई करता है। सवाल: अगर पूरे भारत की एक थाली आपके सामने सजाई जाए तो उसमें कौन-कौन से व्यंजन होने चाहिए? संजीव कपूर: देखिए, बड़ा मुश्किल सवाल है। मेरा मानना यह है कि जहां पर आप हों, वहीं का खाना खाना चाहिए। उस समय वही आपका देश है। आज मैं जयपुर में हूं, तो मेरे लिए यहां की लोकल चीजें ही सबसे अच्छी हैं। यहां की धरती पर जो उग रहा है, यहीं के लोग जो बना रहे हैं, आज के मौसम का जो सीजनल खाना है, वही सबसे बढ़िया है। अभी आपसे मिलने से पहले शेफ ने पूछा कि सर क्या खिलाएं? उन्होंने कई डिशेज का नाम लिया। मैंने कहा कि यहां के स्थानीय स्वाद को चखाइए। मेरी थाली में दाल-बाटी-चूरमा रहेगा, राबड़ी, गट्टे का साग, लाल मांस तो रहेगा, लेकिन मेरा मानना है कि जो चीज कई साल से फेमस है, उसके अलावा वे चीजें होनी चाहिए जो गांव में बनती है, आम घरों में बनती है। अभी जोधपुर में दोस्त शैलेश लोढ़ाजी की बेटी की शादी में गया तो मैंने उनसे चक्की की सब्जी के लिए पूछ लिया। तब उन्होंने कहा कि सर अब कोई बनाना ही नहीं जानता। मैंने फिर भी उनसे यह बनवाने के लिए कह दिया। मैं चाहता हूं कि हमारा खाना सिर्फ 10 डिशेज तक सीमित न हो जाए। आज दुनिया भारतीय खाने को सिर्फ बटर चिकन, नान और बिरयानी तक ही जानती है, लेकिन भारत इससे कहीं बड़ा है। राजस्थान भी सिर्फ दाल-बाटी और केर-सांगरी तक सीमित नहीं है। यहां काचरी है, मथानिया मिर्च है। ऐसी बहुत सारी चीजें हैं, जिनके बारे में नई पीढ़ी को पता ही नहीं है। अगर हम इनके बारे में बात करेंगे, तो किसानों को भी फायदा मिलेगा। उनका बाजार भी बढ़ेगा। सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुकिंग ऑयल कम करने की अपील की है। इसे कैसे लागू किया जा सकता है? संजीव कपूर: बहुत आसानी से किया जा सकता है। आज Air Fryer आ गए हैं। बहुत सारी चीजें बिना तेल के बन सकती हैं। पहले बर्तन ऐसे होते थे कि तेल ज्यादा डालना पड़ता था, लेकिन अब कुकवेयर इतना अच्छा हो गया है कि तेल की जरूरत बहुत कम रह गई है। मैं तो लोगों से सिर्फ एक बात कहता हूं, अगर आज किसी सब्जी में तीन चम्मच तेल डालते हैं तो कल से डेढ़ चम्मच डालना शुरू कर दीजिए। बस आधा कर दीजिए। स्वाद में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि स्वाद तेल से नहीं, मसालों और संतुलन से आता है। सवाल: 'खाना खजाना' शुरू करने के पीछे आपकी सोच क्या थी? संजीव कपूर: जब खाना खजाना शुरू किया था, तब इतनी बड़ी सोच नहीं थी कि यह इतना बड़ा शो बन जाएगा। मेरी सिर्फ दो बातें थीं। पहली कि पुरुष भी किचन में जाएं। दूसरी, जो महिलाएं रोज खाना बनाती हैं, उनकी सराहना हो। घर में अक्सर लोग सिर्फ कमी निकालते हैं, लेकिन यह नहीं कहते कि खाना अच्छा बना है। मैं चाहता था कि लोग खाने की अच्छाइयां ढूंढना सीखें। धीरे-धीरे लोगों ने खाना बनाना सीखा। जिन लोगों को बिल्कुल खाना नहीं आता था, उन्होंने भी सीख लिया। सवाल: आपकी जिंदगी की सबसे यादगार तारीफ कौन-सी रही? संजीव कपूर: ऐसी हजारों कहानियां हैं, लेकिन एक कभी नहीं भूलता। मैं कोलंबो एयरपोर्ट पर था। एक महिला आईं, मेरे पैर छुए और रोने लगीं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद उन्हें खाना बनाना नहीं आता था। ससुराल में उन्हें प्यार नहीं मिलता था। हालत ऐसी हो गई थी कि उन्होंने आत्महत्या करने तक का सोच लिया था। फिर किसी ने मेरी किताब दी और खाना खजाना देखने को कहा। उन्होंने खाना बनाना सीखा। 3 साल बाद वह महिला अपने पति के साथ हनीमून पर कोलंबो आई थीं। उन्होंने कहा कि शादी के समय हनीमून पर इसलिए नहीं जा पाए क्योंकि खाना बनाना नहीं आता था। आज पूरा परिवार बहुत प्यार करता है। यह सुनकर मुझे खुशी भी हुई, लेकिन उनके पति पर गुस्सा भी आया कि तीन साल तक ऐसा क्यों होने दिया। वह घटना मैं आज तक नहीं भूल पाया। सवाल: आज के युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है, जो शेफ बनना चाहते हैं? संजीव कपूर: सब्र का फल मीठा होता है। यह पहले भी सही था और आज भी सही है। चाहे शेफ बनना हो या कोई भी प्रोफेशन। निरंतरता सबसे जरूरी है। शॉर्टकर्ट से कुछ समय तक काम कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक वही सफल होता है जो लगातार सीखता है, मेहनत करता है और धैर्य रखता है।