करौली के सपोटरा स्थित जाखोदा गांव में राज फाउंडेशन संस्थान के निजी वृद्धाश्रम में देखभाल और बुनियादी सुविधाओं में खामियां मिलीं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश प्रताप सिंह मीना ने शुक्रवार को निरीक्षण किया। आटे में कचरा और कुछ एक्सपायरी दवाइयां मिलीं। जरूरी रजिस्टर भी नहीं दिखाए गए। वृद्धाश्रम कस्बे से करीब 10 किलोमीटर दूर जाखोदा गांव के आखिरी छोर पर है। वहां पहुंचने का रास्ता संकरा है और आसपास अस्पताल जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। आवागमन के साधन कम होने से बुजुर्गों को परेशानी हो सकती है। 2 ही कर्मचारी मौजूद मिले निरीक्षण के समय वहां केवल 2 कर्मचारी मौजूद थे। बाकी कर्मचारी नहीं मिले और उनकी उपस्थिति का रजिस्टर भी नहीं दिखाया गया। वृद्धाश्रम में 2 महिलाओं और 2 पुरुषों समेत 4 बुजुर्ग रह रहे थे। उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड भी नहीं मिला। एक बुजुर्ग महिला नर्वदा परिसर के झोंपड़ीनुमा कमरे में गोबर से लिपाई-पुताई करती मिलीं। कर्मचारियों ने बताया कि संस्था प्रधान अवधराज सभी रजिस्टर अपने साथ सपोटरा ले गए हैं। इस वजह से वृद्धाश्रम में कोई रजिस्टर उपलब्ध नहीं था। साफ-सफाई व्यवस्था सही नहीं मिली रसोई की जांच में आटे में आटे से ज्यादा कचरा मिला। भोजन की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी। बुजुर्गों ने बताया कि उन्हें सुबह चावल और भोजन में दाल-चपाती दी गई। सब्जी और सलाद मिलने के बारे में वे जानकारी नहीं दे सके। कुछ दवाइयों की मियाद खत्म हो चुकी थी और शौचालयों की सफाई भी ठीक नहीं मिली। निरीक्षण में सामने आया कि पहले भी वृद्धाश्रम में कमियां मिली थीं और संचालक को सुधार के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। सचिव ने बुजुर्गों की देखभाल, भोजन, स्वास्थ्य और सफाई की व्यवस्था सुधारने की जरूरत बताई।