भास्कर न्यूज | बाड़मेर कृषि विज्ञान केन्द्र श्योर दांता, बाड़मेर में माहभर से चल रहे भारत सरकार के महत्वाकांक्षी खेत बचाओ अभियान का मंगलवार को समापन हो गया। 1 से 30 जून तक चले इस अभियान के जरिए किसानों को न केवल संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया, बल्कि उन्हें प्राकृतिक खेती की ओर लौटने का बड़ा संदेश भी दिया गया। एक महीने की इस कवायद में केन्द्र ने 22 गांवों में किसान गोष्ठियां आयोजित कर 1500 से अधिक किसानों व महिला किसानों को खेती की आधुनिक व टिकाऊ तकनीकों से जोड़ा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने कृषि की स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि यदि किसान को खेती को मुनाफे का सौदा बनाना है, तो सबसे पहले मिट्टी की सेहत सुधारनी होगी। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे बिना जांचे-परखे रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल बंद करें। डॉ. विनय ने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर ही खाद का प्रयोग करें। जैविक और प्राकृतिक संसाधनों का अधिक उपयोग करने से न केवल उत्पादन लागत कम होती है, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी पीढ़ियों तक बनी रहती है। समापन समारोह में टिड्डी सह आईपीएम केंद्र, बाड़मेर के सहायक निदेशक बाबूलाल मीणा ने टिड्डी के खतरों और उनके प्रभावी प्रबंधन पर किसानों को सचेत किया।