बीकानेर के धनेरू गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बुरलाई तलाई का जर्जर भवन आखिरकार गुरुवार को भरभराकर ढह गया। भवन की छत गिरने के साथ दीवारों में भी गहरी दरारें आ गईं। गनीमत रही कि दो दिन पहले ही भवन को खाली करके स्टूडेंट्स को पेड़ के नीचे पढ़ाने की व्यवस्था कर दी गई थी। इससे बड़ा हादसा टल गया। विद्यालय में करीब 80 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। भवन असुरक्षित होने के कारण बच्चों को स्कूल परिसर में पेड़ों के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। संस्था प्रधान सोनू कुमारी मीणा ने बताया कि गत दिनों हुई तेज बारिश के बाद 19 जून को सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की टीम ने विद्यालय का निरीक्षण किया था। जांच में भवन को पूरी तरह जर्जर और उपयोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया। इसके बाद धनेरू पीईईओ के निर्देश पर भवन के बाहर 'प्रवेश निषेध' का बैनर लगाकर इसे बंद कर दिया गया था। ग्रामीणों ने पहले ही दी थी चेतावनी ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन लंबे समय से खस्ताहाल था। बरामदे की करीब 20 पट्टियों में दरारें आ चुकी थीं, जो गुरुवार को पूरी तरह गिर गईं। ग्रामीणों ने पहले ही शिक्षा निदेशक और जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर नए भवन के निर्माण की मांग की थी। ग्रामीण ओमप्रकाश स्वामी ने बताया कि गांव में लगातार नए विद्यालय भवन की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भवन गिरने के बाद अब नए निर्माण में और देरी नहीं होनी चाहिए। दूसरा स्कूल 9 किलोमीटर दूर ग्रामीणों ने बताया कि धनेरू से निकटतम दूसरा सरकारी विद्यालय करीब 9 किलोमीटर दूर है। ऐसे में छोटे बच्चों को रोज इतनी दूरी तय कराना संभव नहीं है। बच्चों की पढ़ाई सुचारू रखने के लिए इसी स्थान पर नए विद्यालय भवन का शीघ्र निर्माण आवश्यक है। ग्रामीण केसूराम, कालूराम, गिरधारी, जीवनराम, अमराराम, लालाराम, मोडारा, सुरेश कुमार, छोटूराम और रामुराम सहित अनेक लोगों ने शिक्षा विभाग से तत्काल नए भवन के निर्माण की मांग की है। भाजपा नेता आईदान पारीक ने बताया कि पिछले दिनों हुई बारिश के बाद ही स्कूल की छत की पट्टियों में दरारें आ गई थीं और गुरुवार को पूरी छत गिर गई। उन्होंने बताया कि इससे पहले तोलियासर और बाना गांव के सरकारी स्कूलों में भी भवन की पट्टियां गिरने के मामले सामने आ चुके हैं। अब धनेरू की घटना ने सरकारी स्कूल भवनों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसलिए टूट रही पटि्टयां इंजीनियर बताते हैं कि स्कूल की छत के लिए सीढ़ियां नहीं बनती। ऐसे में स्कूल की छत पर बारिश के बाद पानी एकत्र हो जाता है। नालियां कचरे के कारण बंद हो जाती है और इसी कारण पानी पड़ा रहने से पटि्टयां कच्ची होकर गिर जाती है। स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि छतों को लगातार साफ करें। श्रीडूंगरगढ़ में चार दिन में दो स्कूलों में पटि्टयां गिरी बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ में पिछले चार दिन में ये दूसरा अवसर है जब सरकारी स्कूल में पटि्टयां गिरने की घटना हुई है। इससे पहले 29 जून को तोलियासर स्कूल में स्टाफ पहुंचा तो वहां भी एक कमरे की दस पटि्टयां गिरी हुई मिली। गनीमत रही कि इस दौरान भी कोई स्टूडेंट क्लास में नहीं था। बीकानेर के सरकारी स्कूलों के भवनों की पोल खोलती ये खबरें भी पढ़ें…। तेज आंधी-बारिश से सरकारी स्कूल की छत गिरी:जिस कमरे की सत्रह पटि्टयां टूटकर गिरी, उसमें 56 बच्चे पढ़ते हैं, अभी छुटि्टयां बीकानेर में सरकारी स्कूल की छत गिरी:गर्मियों की छुट्‌टी में हुआ हादसा; PWD पूरी बिल्डिंग को अनसेफ घोषित कर चुका