राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (आरईआरसी) ने दो साल से बिजली की टैरिफ नहीं बढ़ाई, लेकिन बिजली वितरण निगमों (डिस्कॉम्स) ने बिजली उपभोग व बिल बढ़ने का बहाना कर उपभोक्ताओं को दो हजार से 20 हजार रुपए की संशोधित सिक्योरिटी डिपोजिट (प्रतिभूति राशि) जमा करवाने के नोटिस थमा दिए हैं। अकेले जयपुर जिले (जेसीसी व जेपीडीसी) में 50 हजार उपभोक्ताओं को नोटिस दिए हैं। नोटिस में सिक्योरिटी राशि जमा नहीं होने पर बिजली कनेक्शन काटने की धमकी दी जा रही है। जबकि उपभोक्ता के बकाया बिलिंग राशि पर ही कनेक्शन काटा जा सकता है। उपभोक्ताओं की दलील है कि जब दो साल में बिजली टैरिफ बढ़ी ही नहीं है तो डिस्कॉम ने विद्युत शुल्क व स्थायी शुल्क कैसे बढ़ा दिए। हर दो साल में ऐसे नोटिस थमाकर उपभोक्ताओं से वसूली होती है, इसकी जांच होनी चाहिए। कनेक्शन पर बिजली उपभोग बढ़ गया होगा: डिस्कॉम जयपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (जेसीसी) अशोक रावत का कहना है कि उपभोक्ता का बिजली उपभोग बढ़ जाता है। आरईआरसी का आदेश है कि डिस्कॉम के पास उपभोक्ता के खाता में दो महीने के बिजली उपभोग की राशि के बराबर राशि जमा होनी चाहिए। बिजली उपभोग या टैरिफ बढ़ने के बाद सिक्योरिटी डिपोजिट पर हर साल एक जुलाई को प्रतिभूति राशि पर बैंक ब्याज भी दिया जाता है। बिल में नहीं दिखाते सिक्योरिटी डिपोजिट: बिजली के बिलों में सिक्योरिटी डिपोजिट नहीं दर्शाया जाता है। इसके साथ ही पहले से जमा डिपोजिट पर ब्याज भी नहीं मिलता है। इससे उपभोक्ताओं में कंफ्यूजन होता है। उपभोक्ताओं की मांग है कि बिजली बिल में सिक्योरिटी डिपोजिट का कॉलम होना चाहिए। क्या है डिस्कॉम का नोटिस: जयपुर डिस्कॉम के विद्युत आपूर्ति की शर्तें एवं निबंधन (टीसीओएस)-2021 की धारा 8.4 के तहत हर साल मई 2021 से अप्रैल 2022 तक की अवधि में किए गए वास्तविक उपभोग के आधार पर विद्युत खर्च, स्थायी शुल्क के बराबर कुल प्रतिभूति राशि का निर्धारण किया है। अंतिम तारीख तक राशि जमा नहीं करवाने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी जा रही है। उपभोक्ताओं से मांग रहे सबूत: बिजली कनेक्शन के समय सिक्योरिटी राशि जमा हो जाती है, लेकिन नोटिस में यह शून्य दिखाया है। अधिकतर नोटिस में बहुत ही कम राशि जमा दिखाई है। उपभोक्ताओं ने आपत्ति दर्ज करवाई तो रसीद व सबूत लाने को कहा जा रहा है। उपभोक्ता का कहना है कि तीन से दस साल पहले की रसीद ढूंढना मुश्किल है।