हनुमान जन्मोत्सव पर आज सीकर शहर के अलग-अलग मंदिरों में कई कार्यक्रम हुए। देवीपुरा बालाजी, लंकापुरी बालाजी, बोलता बालाजी, झुंझार धाम समेत सभी मंदिरों में बालाजी को रोट का भोग लगाया गया और विशेष पूजा की गई। मंदिरों में फूलों और लाइटिंग से विशेष सजावट की गई है। श्रद्धालुओं ने हनुमानजी के जन्म पर खीर-चूरमे का प्रसाद चढ़ाया। वहीं दक्षिणमुखी देवीपुरा बालाजी को सोने का टीका लगाया गया है। बालाजी की मूर्ति के चारों तरफ चांदी का मंडप है, जिसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपए है। बड़ी संख्या में भक्त बालाजी का विशेष श्रृंगार करने आए। दोपहर 12 बजे महाआरती हुई। इससे पहले मंदिर में वाल्मीकि सुंदरकांड तक 18 घंटे तक लगातार 101 किलो हवन सामग्री का यज्ञ किया गया। मंदिर में शेखावाटी के भजन गायकों ने प्रस्तुति दी। रात में झांकियां का प्रदर्शन होगा। देवीपुरा बालाजी में देश-विदेश के प्रवासी बंधुओं की गहरी आस्था है। देवीपुरा बालाजी के साल में 1 बार लगता है सोने का टीका सीकर के बजरंग कांटा सर्किल के पास देवीपुरा बालाजी का मंदिर है। महंत ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर मूर्ति का मोतियों और सुनहरे गोटे से जड़ी गुलाबी पोशाक का चोला पहनाया गया है। चांदी के मंडप में विराजे बालाजी महाराज के सोने का मुकुट लगा हुआ है। पूरे साल में एक बार हनुमान जन्मोत्सव(चैत्र पूर्णिमा) के मौके पर बालाजी के सोने का तिलक किया जाता है, सोने के तिलक को गंगाजल से धोने के बाद महाआरती के समय दोपहर 12 बजे चढ़ाया जाता है और शाम को संध्या आरती के बाद 7 बजे उतारा जाता है। पुजारी परिवार के रतनलाल शर्मा व राजेंद्र शर्मा ने बताया कि देवीपुरा बालाजी महाराज चांदी की पायल पहने हुए हैं और यहां चांदी से बनी खड़ाऊ भी हैं। श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने पर चांदी के छत्र चढ़ाते हैं। हर साल हनुमान जन्मोत्सव पर बाबा के विशेष चोळा चढ़ाया जाता है। पुजारी परिवार के सदस्य राजेंद्र, पवन, प्रदीप, रमेश बाबा का श्रृंगार करते हैं। दक्षिणमुखी देवीपुरा बालाजी के चौथे पहर के दर्शन का विशेष महत्त्व है। मंदिर परिसर में भगवान गणेश और राम दरबार की मूर्तियां भी हैं, राम दरबार के मंढ में अष्टधातु से निर्मित हनुमानजी की पंचमुखी-अष्टभुजा मूर्ति भी विराजमान है। श्रीकल्याण धाम 1100 हनुमान चालीसा पाठ, 21 किलो रोटे का भोग सीकर के प्राचीन श्रीकल्याण धाम महंत विष्णु प्रसाद शर्मा के सान्निध्य में हनुमान जन्मोत्सव पर विभिन्न कार्यक्रम हुए। बालाजी महाराज की महाआरती और हनुमान चालीसा के 1100 पाठ किए गए। श्रीकल्याण धाम के व्यवस्थापक रवि प्रसाद शर्मा ने बताया कि सुबह साढ़े 8 बजे बालाजी महाराज की महाआरती कर 21 किलो रोटे का भोग लगाया गया और भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। 300 फीट ऊंचे पहाड़ पर कोटड़ा बालाजी धाम सीकर के रैवासा गांव में पहाड़ी पर करीब 300 फीट ऊंचाई पर स्थित प्राचीन कोटड़ा बालाजी धाम लगभग एक हजार साल पुराना मंदिर है। महंत गोपालदास ने बताया कि मध्य प्रदेश के कोटड़ा गांव से 2 तांत्रिक इस प्रतिमा को चोरी कर ले जा रहे थे। उसी दौरान रैवासा पहाड़ी पर तपस्या कर रहे संत नाथूरामदास ने उन्हें रोककर प्रतिमा को मुक्त कराया। इसके बाद पहाड़ी पर ही बालाजी की स्थापना कर दी गई। 165 सीढ़ियों से पहुंचते हैं भक्त पहाड़ी पर स्थित 300 फीट ऊंचे मंदिर तक पहुंचने के लिए 165 सीढ़ियां बनी हुई हैं। करीब 25 वर्ष पहले मंदिर तक सड़क मार्ग भी तैयार किया गया। पहाड़ी पर खंडेला रियासत का प्राचीन गढ़ भी है। आज सुबह सवा 7 बजे हनुमानजी का चोला चढ़ाया गया। सवा 8 बजे भगवान राम परिवार के पदचिह्नों का अभिषेक हुआ। मंदिर को फूलों से सजाकर 56 भोग की झांकी सजाई। सवा 11 बजे महाआरती के बाद चूरमे का प्रसाद बांटा गया। पहाड़ी पर बने गढ़ में खंडेला रियासत के छोटा पाना के राजा सज्जन सिंह और बड़ा पाना के राजा राम सिंह भी रहते थे और नियमित रूप से बालाजी के दर्शन करने आते थे। मंदिर का गर्भगृह करीब एक हजार वर्ष पुराना है, जिसमें आज भी मूल प्रतिमा स्थापित है।