शेखावाटी की स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना और करीब 240 साल पुरानी ऐतिहासिक मेड़तनी बावड़ी अब जल्द ही अपने पुराने वैभव में नजर आएगी। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रही इस विरासत को सहेजने के लिए प्रशासन ने 2.50 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया है। खास बात यह है कि इसमें पर्यटन विभाग और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना दोनों की बराबर (50-50%) हिस्सेदारी होगी। पर्यटन विभाग 1.25 करोड़ रुपए और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान से 1.25 करोड़ खर्च होंगे। उप निदेशक, पर्यटन विभाग, झुंझुनूं देवेंद्र चौधरी ने बताया कि मेड़तनी बावड़ी के संरक्षण के लिए 2.50 करोड़ का बजट स्वीकृत है। पुरातत्व विभाग इसकी कार्यकारी एजेंसी होगी। हमारा उद्देश्य ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देना है। 150 फीट गहरी विरासत: अब अंधेरे में नहीं, रोशनी में दिखेगी कला परियोजना के तहत पुरातत्व विभाग इस तरह काम करेगा कि बावड़ी का मूल ढांचा (Original Structure) प्रभावित न हो। पर्यटकों के गिरने के खतरे को देखते हुए पूरी बावड़ी में आकर्षक और मजबूत रेलिंग लगाई जाएगी। बावड़ी के बाहर व्यवस्थित पार्किंग स्लॉट बनाया जाएगा ताकि जाम की स्थिति न बने। सालों से जमा कचरा साफ होगा और जर्जर हो चुकी चारदीवारी की मरम्मत की जाएगी। परिसर में शुद्ध पेयजल और बैठने के लिए बेंचों की व्यवस्था होगी। शाम के समय बावड़ी की खूबसूरती निखारने के लिए विशेष लाइटिंग की योजना है। हर माह आते हैं 5 हजार सैलानी, अब आंकड़ा दोगुना होगा पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जर्जर हालत के बावजूद हर महीने करीब 5,000 देसी-विदेशी पर्यटक इस बावड़ी को देखने आते हैं। विभाग का मानना है कि सुविधाओं के विस्तार और सौंदर्यीकरण के बाद यह संख्या 10,000 के पार जा सकती है, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। मेड़तनी बावड़ी का इतिहास मेड़तनी बावड़ी का 1783 ईस्वी के आसपास 'भक्तन मेड़तनी' ने इसका निर्माण करवाया था। यह अपनी गहरी सीढ़ियों और कलात्मक मेहराबों के लिए जानी जाती है। प्राचीन काल में जल संचयन और तपती गर्मी में ठंडक देने के लिए इसे एक इंजीनियरिंग मास्टरपीस माना जाता है।