शिवगंज शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से जवाई नदी तट पर निर्मित रिवर फ्रंट बदहाली का शिकार हो गया है। ठेकेदार द्वारा अप्रैल 2025 में काम छोड़ देने के बाद से यह पिछले साढ़े ग्यारह महीनों से वीरान पड़ा है। नगर पालिका ने शुरुआती एक वर्ष तक इसकी देखरेख की थी। बाद में संचालन और रखरखाव का ठेका दिया गया, जिससे पालिका को प्रति माह लगभग डेढ़ लाख रुपए की आय हो रही थी। ठेका रद्द होने के बाद से यह आय भी बंद हो गई है। रिवर फ्रंट की स्थिति दयनीय है। ऑस्ट्रेलियन घास सूख चुकी है, लाइटें टूटी हुई हैं और सभी 11 सीसीटीवी कैमरे और एक मूविंग कैमरा बंद पड़े हैं। टूटी पाइपलाइन के कारण पेड़-पौधों को पानी नहीं मिल पा रहा है। परिसर में कचरे के ढेर, शराब की बोतलें और आवारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा सकता है। कई बेंच टूटी हुई हैं या गायब हो चुकी हैं, और 'आई लव शिवगंज' बोर्ड भी खंडहर में तब्दील हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शहरवासियों द्वारा समय-समय पर चिंता व्यक्त करने और समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद पालिका प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। दिसंबर 2025 में पालिका अधिकारियों ने निरीक्षण कर औपचारिकता पूरी की, लेकिन सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। नगर पालिका ने रिवर फ्रंट को दोबारा ठेके पर देने के लिए 19 सितंबर 2025 को निविदा जारी की थी, जिसमें सवा लाख रुपए प्रतिमाह अनुमानित आय और साढ़े सात लाख रुपए अमानत राशि तय की गई थी। 1 अक्टूबर को निविदा खुलने पर कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद 20 नवंबर को दोबारा निविदा निकाली गई, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। यदि समय पर ठेका हो जाता तो पालिका को अब तक करीब 17 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हो सकता था। शहरवासियों का दर्द: “घूमने आएं या बदहाली देखने? शहरवासी लोकेश कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कभी यह स्थान परिवार के साथ समय बिताने का सबसे पसंदीदा स्पॉट था, लेकिन आज यहां आना भी मुश्किल हो गया है। “करोड़ों खर्च कर बनाया रिवर फ्रंट अब कचरे और मवेशियों का अड्डा बन गया है। समझ नहीं आता घूमने आएं या बदहाली देखने,” उन्होंने तंज कसते हुए कहा। विपक्ष का प्रहार- जिम्मेदारी से भाग रहा प्रशासन यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाशराज मीणा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह रिवर फ्रंट आमजन की सुविधा और शिवगंज को पर्यटन पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इसकी हालत बद से बदतर हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी नेताओं की अनदेखी और पालिका की उदासीनता के चलते करोड़ों का यह प्रोजेक्ट बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। मीणा ने कहा, “विकास कार्य करना आसान है, लेकिन उसे संभालना जिम्मेदारी का काम है, जिसमें वर्तमान नेतृत्व पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मौजूदा जनप्रतिनिधियों और पालिका प्रशासन की होगी।”