आर्य समाज मंदिर में होने वाली शादियों के रजिस्ट्रेशन में भी रिश्वतखोरी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह वसूली नगर निगम के लालकोठी स्थित मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय में बैठे रजिस्ट्रार और कर्मचारी ही कर रहे थे। गुरुवार को एसीबी ने मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह और कर्मचारी राकेश चौधरी को 12,500 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि प्रताप नगर स्थित आर्य समाज मंदिर के प्रधान ने कोटा चौकी में शिकायत दी थी। इसमें बताया कि मंदिर में गरीब और दहेज-रहित विवाह कराए जाते हैं। विवाह के बाद नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। इसके लिए निगम की निर्धारित फीस 110 रुपए है, लेकिन आरोपी प्रति विवाह 2500 से 3000 रुपए तक मांग रहे थे। सत्यापन में शिकायत सही पाई गई। गुरुवार को आरोपियों ने परिवादी को रिश्वत लेकर नगर निगम कार्यालय बुलाया। डीआईजी ओम प्रकाश मीणा के सुपरविजन में एसीबी टीम ने दोनों को 12,500 रुपए लेते पकड़ लिया। तलाशी में कर्मचारी राकेश चौधरी के पास 38 हजार रुपए अतिरिक्त मिले, जिन्हें जब्त किया गया है। एसीबी ने आर्य समाज मंदिर में हुई शादियों और निगम कार्यालय में दर्ज विवाहों का रिकॉर्ड जब्त किया है। जांच की जा रही है कि आरोपी रोजाना कितनी वसूली करते थे और इस रकम का बंटवारा किन-किन में होता था। दोनों आरोपी लंबे समय से मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात थे। 2 साल के लिए डेपुटेशन पर आया विक्रम, 6 साल हो गए जयपुर | नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की लगातार कार्रवाई ने वर्षों से डेपुटेशन पर जमे अधिकारियों और उनकी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और विवाह पंजीयन रजिस्ट्रार विक्रम सिंह पिछले छह साल से डेपुटेशन पर काम कर रहा है। 17 जून 2020 को हेरिटेज निगम में आए विक्रम का कार्यकाल चार साल पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन मूल विभाग सांख्यिकी में वापस नहीं भेजा गया। पांच साल तक हेरिटेज में जन्म-मृत्यु और विवाह पंजीयन रजिस्ट्रार रहने के साथ तत्कालीन आयुक्त के ओएसडी भी रहा। डीएलबी तक शिकायत पहुंची तो ग्रेटर निगम में पदस्थापित कर दिया गया। यहां भी जन्म-मृत्यु और विवाह पंजीयन रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी ले ली। करीब डेढ़ साल से इसी पद पर काम कर रहा है। पंजीयन व्यवस्था केंद्रीकृत रखने के आरोप दोनों नगर निगमों के पुनर्गठन के बाद हेरिटेज में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और विवाह पंजीयन का काम बंद करा दिया गया था। आरोप है कि इसमें विक्रम की अहम भूमिका रही। वह पंजीयन व्यवस्था को केंद्रीकृत रखना चाहता था, ताकि अधिकारियों का हस्तक्षेप न हो। सूत्रों के अनुसार, जोनों में उप रजिस्ट्रारों की तैनाती में भी विक्रम की राय ली जाती थी। नामांतरण खोलने को पटवारी ने मांगे 1 लाख रुपए, दलाल गिरफ्तार हुआ तो भागा जयपुर/चौमूं | एसीबी ने गुरुवार को चौथी कार्रवाई चौमूं में की। यहां पर आलीसर पटवारी सुरेंद्र स्वामी जमीन का नामांतरण खोलने की एवज में 1 लाख रुपए मांग कर परिवादी को परेशान कर रहा था। दिसंबर 2025 में खरीदी गई जमीन का नामांतरण अभी तक अटका रखा था। ऐसे में पीड़ित ने एसीबी में शिकायत की। सत्यापन के दौरान मामला सही पाया गया। गुरुवार को दलाल आलीसर हलके के चारणवास गांव निवासी भेरूलाल यादव ने परिवादी को चौमूं स्थित पेट्रोल पंप के पास चाय की थड़ी पर रुपए लेकर बुलाया। इधर, पीछा कर रही एसीबी की टीम ने दलाल भेरूराम को रंगेहाथ पकड़ लिया, लेकिन पटवारी सुरेंद्र स्वामी फरार हो गया। उसे पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। एसीबी डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि जयपुर के एक व्यक्ति ने आलीसर के चारणवास गांव में गतवर्ष सवा 2 बीघा भूमि मय मकान, बोरिंग भूमि खरीदी थी। इसका नामांतरण खोलने के लिए पटवारी सुरेंद्र से संपर्क किया तो आनाकानी करने लगा। इस बीच दलाल भेरूराम यादव ने एक लाख रुपए मांगे।