सीकर में दंग की नसियां तहसील के सामने ठेले-रेहड़ी हटाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आज फल-सब्जी के ठेले लगाने वालों ने धर्मशाला प्रबंधन के मौखिक आदेशों का कड़ा विरोध जताया। ठेले-रेहड़ी संचालकों का कहना है कि चातुर्मास के नाम पर यह जगह खाली करवाकर सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। विरोध में ठेले-रेहड़ीवालों के साथ उनके परिवार के सदस्यों ने भी नारेबाजी की और प्रशासन से सहयोग की मांग की है। मैरिज होम और पार्किंग का विवाद स्थानीय वेंडर मोहम्मद नदीम ने बताया कि दंग की नसियां के सामने पिछले कई वर्षों से सैकड़ों लोग ठेले और रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। दंग की नसियां धर्मशाला को मैरिज होम के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कारण वहाँ अक्सर पार्किंग की समस्या रहती है। शादियों और अन्य आयोजनों के दौरान पार्किंग व्यवस्था का हवाला देकर धर्मशाला प्रबंधन द्वारा फल-सब्जी के ठेले हटाने का दबाव बनाया जाता है। जबकि, नगर परिषद और कलेक्टर की जांच में पहले ही साफ हो चुका है कि ठेलेवाले अपनी सही जगह पर हैं और वहाँ कोई अतिक्रमण नहीं है। चातुर्मास के नाम पर दबाव का आरोप ठेले-रेहड़ी वालों ने आरोप लगाया कि धर्मशाला प्रबंधन उन्हें पुलिस प्रशासन का डर दिखाकर और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर हटाने की कोशिश कर रहा है। अब जैन मुनि के आगामी चातुर्मास को आधार बनाकर यह कार्रवाई की जा रही है। वेंडर्स का कहना है कि यदि उनके ठेले हटाए गए, तो सैकड़ों परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। वैध लाइसेंस होने का दावा ठेलेवालों का कहना है कि उनके पास नगर परिषद की ओर से जारी वैध 'स्ट्रीट वेंडर लाइसेंस' मौजूद हैं। ऐसे में बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें अचानक हटाना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इस एकतरफा कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि यदि दंग की नसियां प्रबंधन को कोई परेशानी है, तो प्रशासन और पुलिस की मध्यस्थता में बातचीत कर समाधान निकाला जा सकता है। इस तरह की सीधी और एकतरफा कार्रवाई से गरीब फल-सब्जी विक्रेताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।