सीकर जिले में खंडेला तहसील में संविदा पर लगे तत्कालीन बाबू (LDC) को कोर्ट ने सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत लेने का दोषी माना है। कोर्ट ने दोषी को 4 साल की जेल और 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। फैसला ACB कोर्ट के स्पेशल जज अखिलेश कुमार ने सुनाया है। 15 हजार रुपए रिश्वत के मांगे थे मामले को लेकर कांवट निवासी परिवादी ने 12 जून 2017 को ACB में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। परिवादी ने बताया था कि उसे जमीन का भू-रूपांतरण करवाना था। इसके लिए खंडेला तहसील ऑफिस के संविदाकर्मी तत्कालीन LDC भैरूबक्श ने काम अटका दिया। भू-रूपांतरण की एवज में 15,000 रुपए रिश्वत की मांग की। ACB ने परिवादी की शिकायत के बाद 14 जून 2017 को आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कोर्ट ने तत्कालीन बाबू को माना दोषी सहायक निदेशक अभियोजन (एडीपी) मुकेश कुमार सिर्वा ने राज्य सरकार की ओर से पैरवी की। उन्होंने बताया कि कोर्ट में कुल 13 गवाह और 40 पुख्ता दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए थे। कोर्ट ने माना कि तत्कालीन बाबू भैरूबक्श ने सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत ली थी। जज ने दोनों पक्षों की दलील सुनने और गवाहों-सबूतों को देखने के बाद संविदाकर्मी तत्कालीन बाबू भैरूबक्श को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत लेने का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।