सिरोही में शहर के समीपवर्ती सिंदरथ गांव स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर में रविवार को 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इस धार्मिक आयोजन को लेकर ग्रामवासियों और संत गरीबदास महाराज के भक्त मंडली में उत्साह देखा गया। कथा से पहले सुबह कलश एवं पौथी यात्रा निकाली गई। यह यात्रा सिरोही शहर के पैलेस रोड स्थित आपेश्वर महादेव मंदिर से आरंभ हुई। श्री मुरलीधर जी मंदिर होते हुए यह शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी। यात्रा से पहले महादेव मंदिर में विद्वान पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ कलश पूजन और भागवत जी का पूजन किया। महिलाएं मंगल गीत गाती हुई कथा स्थल पहुंची पारंपरिक वेशभूषा में सजे पुरुष और महिलाएं सिर पर कलश और श्रीमद्भागवत पौथी धारण किए हुए थे। महिलाएं मंगल गीत गाती हुई सिंदरथ गांव में कथा स्थल पर पहुंचीं। वहां पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ भगवान गणेश जी और ठाकुर जी का पूजा-अर्चना कर भागवत जी को स्थापित किया गया। आयोजक परिवार ने कथा व्यास पंडित जनार्दन ओझा का माल्यार्पण कर स्वागत किया। कथा व्यास जनार्दन ओझा ने श्रीमद्भागवत का मंगलाचरण श्रीनारायण, श्रीवेदव्यास और श्रीशुकदेव महाराज की वंदना के साथ आरंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन के उद्देश्य और दिशा को दर्शाती है। पंडित ओझा ने आगे बताया कि जहां भी भागवत कथा होती है, उसे सुनने मात्र से वहां का संपूर्ण क्षेत्र दुष्ट प्रवृत्तियों से मुक्त होकर सकारात्मक ऊर्जा से सशक्त हो जाता है। उन्होंने निष्काम भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निष्काम भक्ति से ही मनुष्य की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि सत्संग वह है जो हमें भगवान के निकट ले जाए, नाम-जप में रुचि बढ़ाए, मन को विनम्र बनाए और जीवन को पवित्र करे। उनके अनुसार, जहां भगवान की कथा, संतों की वाणी और भक्ति का वातावरण हो, वही सच्चा सत्संग है।