सिंदरथ गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन शनिवार को हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबियों ने कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह के कन्यादान, आरती और दक्षिणा सहित प्राप्त समस्त दान गौशाला में समर्पित किए गए। विद्वान पंडित एवं ज्योतिषाचार्य जनार्दन ओझा ने सात दिनों तक कृष्ण चरित्र का जीवंत बखान किया। मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी और पूरे सप्ताह कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा। पंडित ओझा ने बताया कि श्रीमद् भागवत महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक विचारों का संचार होता है और उसे जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध होता है। उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग ही मनुष्य के कल्याण का सबसे सरल मार्ग है। श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन उन्होंने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंगों का वर्णन किया। पंडित ओझा ने कहा कि मित्रता कैसे निभाई जाए, यह भगवान कृष्ण और सुदामा के प्रसंग से समझा जा सकता है। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। उन्होंने आगे कहा कि परमात्मा कभी अमीरी-गरीबी या जात-पात नहीं देखते, वे तो केवल सच्चे प्रेम और निष्काम भक्ति के भूखे हैं। जब सुदामा द्वारका पहुंचे, तो द्वारकाधीश ने अपने सिंहासन पर बिठाकर उनके चरण अपने आंसुओं से धोए। परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाते हुए पंडित ओझा ने बताया कि परीक्षित ने शुकदेवजी से पूछा कि मृत्यु के निकट खड़े व्यक्ति को क्या करना चाहिए। तब शुकदेव ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का अमृत पान कराया। इस कथा के श्रवण से परीक्षित के सारे संताप, शोक और जन्म-जन्मांतर के पाप धुल गए। यह प्रसंग हमें बताता है कि कलियुग में भगवत नाम स्मरण और कथा श्रवण से सहज ही मुक्ति मिल जाती है। पूर्णाहुति के पावन अवसर पर सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा भी कथा स्थल पर पहुंचे उन्होंने भागवतजी का विधि-विधान से पूजन कर महाआरती उतारी। लोढ़ा ने कथाव्यास पंडित जनार्दन ओझा का पूजन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। लोढ़ा ने इस भव्य और अनुशासित आयोजन के लिए सिन्दरथ की धर्मप्रेमी जनता और सोनी परिवार की सराहना की। कथा की समस्त राशि गौ सेवा में समर्पित इस धार्मिक महोत्सव ने समाज के सामने सेवा का एक अद्भुत उदाहरण पेश किया। कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह में आए कन्यादान की राशि, नित्य पूजन, आरती और दक्षिणा सहित भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई समस्त गुप्त और प्रकट दान राशि को स्थानीय गौशाला में दान कर दिया गया। इस पुनीत कार्य की सबने सराहना की। कथा व्यास ओझा ने बताया कि इस कथा की विशेषता यह रही कि स्वयं श्रीद्वारकाधीश भगवान इस कथा के मुख्य आयोजक थे। भगवान के प्रतिनिधि के रूप में राजेश सोनी परिवार ने पूरी निष्ठा के साथ मुख्य यजमान और व्यवस्थापक की भूमिका निभाई।