सिरोही के मामावली गांव में देवासी समाज के एक परिवार को लड़ाई के मामले में पंचायती ने 19 लाख रुपए का दंड लगाया है। यह दंड भरने के बाद जब परिवार ने पंचों के प्रीतिभोज का 4 लाख का बिल चुकाने से इनकार किया, तो उन्हें समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। अब यह परिवार पिछले एक महीने से सामाजिक तिरस्कार झेल रहा है। यह मामला देवासी समाज के 2 बच्चों के बीच हुई लड़ाई से जुड़ा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए 10 गांवों के पंचों ने एक पंचायती बुलाई। पंचायती में परिवार पर 19 लाख रुपए का दंड लगाया गया। बताया गया कि बच्चों का यह विवाद सिरोही सदर थाना क्षेत्र में हुआ था, जिस पर पुलिस ने मामूली धाराओं में मामला दर्ज किया था। पंचों ने पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट होकर सरूपगंज थाना क्षेत्र के इसरा गांव में पंचायती आयोजित की। इशारे गांव में हुई थी पंचायती दंड वसूली के बाद पंचों ने प्रीतिभोज का आयोजन किया। जब पीड़ित परिवार ने प्रीतिभोज के 4 लाख रुपए का भुगतान करने से मना किया, तो पंचों ने परिवार को समाज से बहिष्कृत करने का फैसला सुनाया। पीड़ित परिवार का 'हुक्का-पानी' बंद इस बहिष्कार के तहत परिवार का समाज से "हुक्का-पानी" बंद कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि परिवार के सदस्य न तो समाज के किसी अन्य सदस्य के घर जा सकते हैं और न ही कोई उनके घर आ सकता है। 1 महीने पहले मामला दर्ज पीड़ित परिवार ने एक महीने पहले पुलिस में मामला दर्ज कराया था। लेकिन पुलिस अब तक जांच का हवाला दे रही है। वहीं स्थानीय विधायक ओटाराम देवासी भी इस कुरीति को खत्म करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। पीड़ित परिवार अब मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहा है कि देवासी समाज में प्रचलित इस कुरीति पर तुरंत रोक लगाई जाए। मामावली गांव के निवासी पीड़ित परिवार के डूंगाराम देवासी ने बताया कि ''बच्चों की लड़ाई पर पंचायती बैठी। 19 लाख का जुर्माना लगाया। फिर प्रीतिभोज का बिल मांगा। हमने नहीं दिया तो हमें समाज से निकाल दिया। एक महीने से हम तिरस्कार झेल रहे हैं। पुलिस में भी शिकायत दी, एक महीना हो गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हम मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि ऐसी कुरीति पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।" इस झगड़े के बाद बढ़ा मामला