प्रतापगढ़ जिले के प्रसिद्ध सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य में 1 मई की शाम 5 बजे से 2 मई की शाम 5 बजे तक 24 घंटे की विशेष वन्यजीव गणना की जाएगी। इस बार गणना प्रक्रिया में अहम बदलाव किया गया है, जिससे वन्यजीवों की गतिविधियों का बेहतर आंकलन किया जा सके। उपवन संरक्षक वन्यजीव मृदुला सिंह ने बताया- सामान्य रूप से वन्यजीव गणना सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक कराई जाती थी। लेकिन इस वर्ष 1 मई को पूर्णिमा होने के कारण गणना का समय बदला गया है। अब यह प्रक्रिया शाम 5 बजे से शुरू होकर अगले दिन शाम 5 बजे तक चलेगी। वन विभाग का मानना है कि पूर्णिमा की रात वन्यजीवों की गतिविधियां अधिक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं, जिससे सटीक आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी। वन्यजीव गणना को सफल बनाने के लिए सहायक वन संरक्षक (वन्यजीव) धरियावद राम मोहन मीना के नेतृत्व में आरामपुरा में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वन कर्मचारियों को गणना से जुड़ी तकनीकी जानकारी और फील्ड प्रशिक्षण दिया गया। पदचिह्नों से पहचान और कैमरा ट्रैप का प्रशिक्षण कार्यशाला में चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य कुलदीप शर्मा ने वन्यजीवों के पदचिह्नों से उनकी पहचान करने की विधि समझाई। इसके अलावा कर्मचारियों को कैमरा ट्रैप लगाने की प्रक्रिया, सही स्थान का चयन, वाटरहोल पर निगरानी और जानवरों के आने-जाने के रास्तों की पहचान करना सिखाया गया। 47 वाटरहोल पर होगी वन्यजीवों की निगरानी सीतामाता अभयारण्य क्षेत्र में इस वर्ष कुल 47 वाटरहोल पर वन्यजीव गणना की जाएगी। इन स्थानों पर कार्मिक तैनात रहेंगे और 24 घंटे तक वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। वन विभाग के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक, व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से कराई जाएगी, ताकि वन्यजीवों की वास्तविक संख्या और उनकी मौजूदगी का सटीक रिकॉर्ड तैयार हो सके। इस अवसर पर क्षेत्रीय वन अधिकारी (वन्यजीव) जाखम सोमेश्वर त्रिवेदी, वन्यजीव धरियावद समेराराम राजपुरोहित और वन्यजीव बड़ी सादड़ी लोकेश मेनारिया अपने अधीनस्थ स्टाफ सहित उपस्थित रहे।