विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब इस श्रेणी के विद्यार्थियों को प्रवेश केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर ही दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और प्रमाण-आधारित बनाना है। 30 दिन की मिलेगी मोहलत विभाग द्वारा जारी आदेशानुसार, प्रमाण-पत्र में दिव्यांगता का प्रकार और प्रतिशत स्पष्ट होना अनिवार्य है। यदि कोई अभिभावक प्रवेश के समय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो उसे अधिकतम 30 दिन का समय दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में प्रमाण-पत्र जमा नहीं कराने पर विद्यार्थी का प्रवेश दिव्यांग श्रेणी से निरस्त कर सामान्य श्रेणी में परिवर्तित कर दिया जाएगा। सत्यापन और सुविधाओं पर जोर विद्यालय स्तर पर संस्था प्रधानों को प्राप्त प्रमाण-पत्रों के गहन सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, फर्जी दस्तावेज पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों में इन विद्यार्थियों के लिए रैंप, सुलभ शौचालय और विशेष शिक्षण सामग्री जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। जिला स्तरीय अधिकारी इन नियमों की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे। सीडब्ल्यूएसएन श्रेणी के विद्यार्थियों के प्रवेश में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम सराहनीय है। वैध प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता से पात्र विद्यार्थियों को ही लाभ मिल सकेगा और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। — मोहरसिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान