मेड़ता तहसील के एक छोटे से गांव जारोड़ा की प्रतिभा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरेगी। सुनील बटेसर का चयन इटली के ट्राइस्टे स्थित प्रतिष्ठित 'अब्दुल सलाम इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स' (ICTP) के विशेष शोध कार्यक्रम के लिए हुआ है। सुनील वहां 'मटेरियल्स सिमुलेशन इन द एज ऑफ AI' विषय पर शोध करेंगे। सुनील ने बताया कि उनका शोध 'थर्मोइलेक्ट्रिक मटेरियल्स' पर केंद्रित है। यह एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसके जरिए कारखानों, मशीनों या वाहनों से निकलने वाली व्यर्थ गर्मी (वेस्ट हीट) को सीधे बिजली में बदला जा सकता है। सुनील वर्तमान में ऐसे नए मटेरियल्स डिजाइन करने में जुटे हैं, जो भविष्य में ऊर्जा संकट का स्थायी समाधान बन सकें। इटली के मंच पर वे इसी शोध का मॉडल दुनिया के सामने रखेंगे। ​पिछली बार ताइवान में मिली थी 1.5 लाख की फेलोशिप ​सुनील ने बताया कि इससे पहले वे ताइवान की 'एकेडेमिया सिनिका' में 3 महीने की इंटर्नशिप पूरी कर चुके हैं। वहां उन्हें 1.5 लाख रुपए प्रतिमाह की फैलोशिप मिली थी। अब इटली में होने वाला 21 दिनों का यह विशेष कार्यक्रम भी पूरी तरह प्रायोजित है। सुनील वहां 'इलेक्ट्रॉन फोनोन फिजिक्स' के साथ-साथ अपने थीसिस कार्य 'थर्मो इलेक्ट्रिक मटेरियल इन्वेस्टिगेशन' को प्रस्तुत करेंगे। ​बेकार जाने वाली गर्मी से बिजली बनाने पर रिसर्च ​वर्तमान में आईआईटी जोधपुर से पीएचडी कर रहे सुनील का शोध मुख्य रूप से ऐसी तकनीक पर है जो बेकार जा रही गर्मी (वेस्ट हीट) को बिजली में बदल सके। सुनील के मुताबिक, वे ऐसे नए मेटेरियल्स डिजाइन कर रहे हैं जो भविष्य में ऊर्जा संकट को कम करने में मददगार साबित होंगे। ​पिता पुलिस थाने के बाहर लगाते हैं चाय का केबिन ​सुनील की यह सफलता इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि उनके पिता रतन बटेसर मेड़ता रोड थाने के बाहर चाय का केबिन चलाते हैं। सुनील अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को देते हुए कहते हैं कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती, इसके लिए धैर्य और निरंतरता बहुत जरूरी है। वे अपने सपनों को उड़ान देने के लिए 31 मई को इटली रवाना होंगे।