पंचायतीराज चुनावों की प्रशासनिक तैयारियों के बीच शहर के पीएम श्री राजकीय फतह उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 2500 विद्यार्थियों को करीब एक महीने पढ़ाई के लिए आवागमन का संकट झेलना होगा। जिला निर्वाचन आयोग ने चुनावी गतिविधियों के संचालन के लिए फतह स्कूल परिसर का पूर्ण अधिग्रहण कर लिया है। इसके तहत यह स्कूल आगामी 20 नवंबर तक निर्वाचन विभाग के अधीन रहेगा। सत्र के बीच में हुए इस अधिग्रहण से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बच्चों को दो दूरस्थ स्कूलों- महात्मा गांधी स्कूल (पुलिस लाइन) और गर्ल्स स्कूल (टेकरी) में शिफ्ट किया है। फतह स्कूल और उक्त दोनों स्कूलों के बीच दूरी करीब दो किमी है। ऐसे में हर दिन आने-जाने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए समय और सुरक्षा के लिहाज से नई असुविधाएं खड़ी हो गई हैं। 2 पारी में चलेगा शैक्षणिक सत्र प्रधानाचार्य गजेंद्र आवोत के अनुसार, फतह स्कूल का संपूर्ण शैक्षणिक स्टाफ अब इन्हीं दो अलग-अलग परिसरों में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाएगा। चूंकि फतह स्कूल मूलतः दो पारियों में संचालित होता है, इसलिए दोनों वैकल्पिक केंद्रों पर भी पारियों के आधार पर समय-सारणी तय की गई है: महात्मा गांधी स्कूल, पुलिस लाइन: यहां सुबह 7:30 से दोपहर 12:30 बजे तक पहली पारी में कक्षा 11वीं और 12वीं के कला एवं वाणिज्य संकाय की कक्षाएं चलेंगी। गर्ल्स स्कूल, टेकरी: दोपहर 12:30 से शाम 5:30 बजे तक दूसरी पारी में 9वीं, 10वीं, 11वीं-12वीं के विज्ञान व कृषि संकाय की पढ़ाई होगी। व्यवस्था के लिए शिक्षा से समझौता क्यों? लोकतांत्रिक समाज में चुनाव कराना संवैधानिक अनिवार्यता है, लेकिन इसकी कीमत स्कूली बच्चों की पढ़ाई से क्यों चुकाई जाए? 2500 विद्यार्थियों को सत्र के बीच स्कूल से हटाकर दूरस्थ परिसरों में भेजना प्रशासनिक निर्णय के साथ शिक्षा की प्राथमिकताओं पर भी सवाल है। खास बात यह है कि 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक अर्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। शिविरा पंचांग में इसकी तिथियां पहले से तय हैं। यानी परीक्षा से महज पांच दिन पहले बच्चे फतह स्कूल लौटेंगे। प्रशासन को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सरकारी परिसर अधिग्रहित करने का अधिकार है। सुरक्षा और केंद्रीय लोकेशन के लिहाज से फतह स्कूल सुविधाजनक विकल्प हो सकता है, लेकिन सवाल चुनाव कराने का नहीं, योजना का है। टाउन हॉल, सामुदायिक केंद्र और अन्य गैर-शैक्षणिक भवनों को विकल्प क्यों नहीं बनाया गया? बच्चों को दूरस्थ परिसरों में शिफ्ट करने से उनकी पढ़ाई ही प्रभावित नहीं होगी, बल्कि अभिभावकों पर आवागमन का वित्तीय बोझ भी पड़ेगा। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जहां लोकतंत्र का उत्सव भी मने और बच्चों के भविष्य से समझौता भी न हो। -शेरसिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, पंचायती राज व माध्यमिक शिक्षक संघ चुनाव के लिए फतह स्कूल बना जिलास्तरीय कंट्रोल रूम चुनाव व्यवस्था के लिए फतह स्कूल परिसर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। संपूर्ण जिले में होने वाली चुनावी गतिविधियों की निगरानी और आधिकारिक संदेशों के आदान-प्रदान के लिए स्कूल में केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है। विभिन्न पंचायतों के लिए तैनात रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) और चुनावी टीमें इसी परिसर से अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना होंगी। मतदान संपन्न होने के बाद बैलेट पेपर (मतपत्रों) की सुरक्षा, सारणीकरण और मतगणना का संपूर्ण कार्य इसी परिसर से संचालित किया जाएगा।