थार के रेगिस्तान में वन्यजीवों पर बढ़ते खतरे को लेकर जैसलमेर राजपरिवार के सदस्य और पूर्व महारावल चैतन्यराज सिंह ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि विलायती बबूल और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। उनके मुताबिक समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो थार का इकोसिस्टम प्रभावित हो सकता है। उन्होंने घास के मैदान, ओरण और गोचर बचाने पर जोर दिया। विलायती बबूल और कुत्तों से बढ़ा खतरा चैतन्यराज सिंह ने एक स्टडी का जिक्र करते हुए बताया कि रेगिस्तान में तेजी से फैल रहा विलायती बबूल और कुत्तों की बढ़ती आबादी वन्यजीवों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि विलायती बबूल की वजह से घास खत्म हो रही है, जिससे वन्यजीवों के घूमने और शिकार करने के नेचुरल तरीके बदल रहे हैं। साथ ही संवेदनशील इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से हिरण और अन्य जीवों पर हमलों का दबाव बढ़ गया है। नेचुरल घर बचाना है जरूरी पूर्व महारावल के मुताबिक, किसी भी इलाके की बनावट ही वहां के जानवरों के जिंदा रहने का आधार होती है। थार के जीवों के लिए घास के मैदान सबसे जरूरी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सेफ जोन और घास के मैदानों से विलायती बबूल को हटाना अब बहुत जरूरी हो गया है। आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने से न केवल जानवरों पर हमले कम होंगे, बल्कि उनसे फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी घटेगा। ओरण और गोचर: थार की लाइफलाइन पूर्व महारावल के मुताबिक, थार की हरियाली और जीव तभी सुरक्षित रहेंगे जब यहाँ के पुराने ओरण और गोचर सुरक्षित रहेंगे। ये जगहें सदियों से पर्यावरण का बैलेंस बनाए हुए हैं। चैतन्यराज सिंह ने कहा कि कुदरत को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर घास के मैदान बचेंगे, तभी थार की खूबसूरती और यहाँ के जानवर सुरक्षित रह पाएंगे। जैसलमेर के 44वें महारावल- चैतन्यराज सिंह जैसलमेर के 44वें महारावल व राजपरिवार सदस्य हैं चैतन्यराज सिंह। उन्होंने अपनी पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से की है। वे पुरानी परंपराओं के साथ आधुनिक सोच को पसंद करते हैं। चैतन्यराज सिंह जैसलमेर के कल्चर, लोक कला और पर्यावरण को बचाने के कामों में हमेशा एक्टिव रहते हैं। वे थार के इकोसिस्टम, खासकर 'गोडावण' और ओरण की जमीन को बचाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हैं। आम जनता के बीच वे काफी लोकप्रिय हैं। ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें…. पूर्व महारावल ने 'कांच के कचरे' के खिलाफ छेड़ा अभियान:चैतन्यराज सिंह बोले- पर्यटन स्थलों पर टूटे कांच से बढ़ा खतरा पश्चिमी राजस्थान की पावन धरा अपनी रेत, संस्कृति और प्रकृति के लिए जानी जाती है, लेकिन वर्तमान में यह अनमोल विरासत 'कांच के कचरे' से गंभीर संकट में है। जैसलमेर राजपरिवार के सदस्य और पूर्व महारावल चैतन्यराजसिंह ने सार्वजनिक स्थानों, खेल मैदानों और खेतों में फैली शराब व बियर की टूटी बोतलों पर चिंता व्यक्त की है। एक निर्णायक जन-जागरूकता अभियान शुरू करने की अपील की है। (पूरी खबर पढ़ें)