गाजसर की रोही में जमा 12 हजार घन मीटर पुराने कचरे से मुक्ति दिलाने और शहर में स्वच्छता की नई व्यवस्था कायम करने के लिए दो बड़े फैसले हुए हैं। राज्य सरकार और चूरू नगर परिषद के इस प्रयास से शहर को कचरे की समस्या से स्थाई निजात मिल सकती है। दरअसल राज्य सरकार की 310 करोड़ रुपए की लीगेसी वेस्ट हटाओ परियोजना के तहत चूरू नगर परिषद को भी शामिल कर लिया गया है। इसके तहत प्रथम चरण में 1250 घन मीटर पुराने कचरे के निस्तारण को लेकर लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (एलओए) यानी स्वीकृति पत्र जारी कर दिया गया है। दूसरी तरफ रोजाना पैदा होने वाले नए कचरे के निस्तारण के लिए नगर परिषद ने अपने स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। हाडा फैक्ट्री के पास स्थापित नए प्लांट के संचालन के लिए एक निजी कंपनी को 3 वर्ष के लिए 4.52 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। नगर परिषद के एईएन इरफान अली ने बताया कि शहर से प्रतिदिन लगभग 70 टन मिक्स कचरा निकलता है। नए प्लांट का वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद अब रोजाना का पूरा कचरा सीधे इसी प्लांट पर जाएगा और उसी दिन उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर दिया जाएगा। इससे भविष्य में कचरे के नए ढेर या पहाड़ नहीं बन पाएंगे। गाजसर में लगे कचरे के ढेर का भी निस्तारण होगा। एईएन अली के मुताबिक पुराने कचरे का निस्तारण बायोमाइनिंग तकनीक से किया जाएगा। इसमें कचरे को छानकर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। मिट्टी और अनुपयोगी कंक्रीट सड़क निर्माण में काम आएगी। प्लास्टिक और धातु को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा, जबकि ज्वलनशील कचरे से आरडीएफ बनाकर सीमेंट फैक्ट्रियों और ऊर्जा संयंत्रों में भेजा जाएगा। परियोजना के तहत पुराने कचरे का निस्तारण तो होगा ही, इसके साथ ही नए प्लांट का कार्य आदेश होने से अब शहर का सारा दैनिक मिक्स कचरा रोज प्रोसेस हो जाएगा। शहरवासियों को कचरे की समस्या से स्थाई समाधान मिलेगा। -अभिलाषा सिंह, आयुक्त, नगर परिषद